माल की सहकारी समिति में लगा ताला।
लखनऊ। सचिवों और कर्मचारियों की हड़ताल से लखनऊ की 75 सहकारी समितियों पर ताला लटका है। खाद वितरण ठप होने से गेहूं की समय से बोआई पर संकट है। आलू, मटर, सरसों की खेती भी प्रभावित हो रही है। समितियों की दौड़ लगा रहे किसानों का मायूस लौटना पड़ रहा है। किसान निजी दुकानों पर अधिक दामों पर खाद बेचने का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, एआर कोऑपरेटिव वैशाली सिंह कुछ समितियों के खुलने का दावा कर रही हैं।
समितियों से जुड़े हैं करीब 1.50 लाख किसान
साधन समिति सचिव परिषद (लखनऊ इकाई) के मीडिया प्रभारी पवन यादव ने बताया कि लखनऊ की सभी समितियां बंद हैं। एक समिति से करीब दो हजार किसान जुड़े हैं। इस तरह जिले की सभी समितियों पर करीब डेढ़ लाख किसान हैं। जिला कृषि अधिकारी डॉ. मेनका ने बताया कि जिले में गेहूं का रकबा लगभग 89 हजार हेक्टेयर है। समितियां बंद होने से समस्या तो है लेकिन निजी दुकानों पर खाद का वितरण हो रहा है।
इसलिए हड़ताल पर हैं सचिव
सचिव मानदेय और बकाये वेतन का भुगतान न होने से नाराज हैं। वे पांच दिनों से ईको गार्डन में अनशन कर रहे हैं। सचिवों के साथ-साथ अकाउंटेंट, चौकीदार और कंप्यूटर ऑपरेटर भी भुगतान न होने से परेशान हैं। चूंकि सचिवों के हस्ताक्षर से ही खाद का वितरण होता है, इसलिए उनके कार्य बहिष्कार से किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है।
स्टॉक पर्याप्त, 10 समितियों पर ताला...नहीं मिल रही खाद
माल। क्षेत्र की माल, नबीडांडा, बहिर गोड़वा, रुदानखेड़ा, खंडसरा समेत 10 सहकारी समितियों पर ताले लटके हैं। खाद का स्टॉक होने के बावजूद वितरण नहीं हो पा रहा है। थरी गांव के किसान सूरज और रामप्रसाद ने बताया कि आलू की बोआई के लिए निजी दुकानों पर डीएपी नहीं मिली तो मजबूरी में एनपीके खरीदनी पड़ी। अमलौली निवासी बागवान अवधेश सिंह ने बताया कि बाग में डालने के लिए खाद नहीं मिल पा रही है। खंडसरा समिति के सचिव कमलेश कुमार सिंह ने बताया कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। (संवाद)
समितियों पर ताला, किसान मायूस
मलिहाबाद। सचिवों की हड़ताल से रहीमाबाद और अन्य समितियों पर कई दिनों से ताला लटक रहा है। रहीमाबाद के किसान संतोष ने बताया कि समिति पर ताला लगा होने से गोभी की फसल को नुकसान हो रहा है। वहीं, अनीस ने बताया कि निजी दुकानदार खाद महंगे दामों पर बेच रहे हैं। इससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सहायक विकास अधिकारी कृषि मानवेंद्र सिंह ने बताया कि हड़ताल के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। (संवाद)