खाद को लेकर हर स्तर पर निगरानी की जा रही है। सचिवों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। समितियों के सदस्य किसानों को वरीयता के आधार पर खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। कई बार कालाबाजारी और तस्करी की स्थिति में समितियों पर भी आरोप लगता है। इन आरोपों को देखते हुए नई व्यवस्था अपनाई जा रही है ताकि हकीकत सामने आ सके। नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और जिम्मेदारी तय होगी।- योगेश कुमार, आयुक्त एवं निबंधक, सहकारिता।
निजी क्षेत्र के फुटकरक दुकानदार खाद में हेराफेरी न करने पाए, इसके लिए भी तत्परता बरती जा रही है। कृषि विभाग की ओर से औचक निरीक्षण की प्रक्रिया निरंतर जारी रखी गई है। जिलों में खाद की कालाबाजारी की निगरानी में लगी टीम अब नए सिरे से जांच करेगी। इसके तहत तिथिवार थोक और फुटकर विक्रेताओं के रजिस्टर का मिलान किया जाएगा। मिलान के दौरान देखा जाएगा कि जिले के थोक विक्रेता के गोदाम से कितनी खाद निकली और फुटकर विक्रेता के गोदाम में संबंधित तिथि में कितनी खाद पहुंची। पिछले दिनों निदेशालय से जिलों में भेजी गई टीमों को यह इनपुट मिला कि थोक विक्रेता के यहां से चली खाद रास्ते में दूसरे स्थान पर चली जाती है। फुटकर विक्रेता एक से दो दिन में संबंधित खाद बिक्री की सूची तैयारी कर लेते हैं।