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UP News: ‘लूट उनकी होती थी, गाली आप खाते थे’, कोटेदारों को सीएम योगी की सौगात; कमीशन भी बढ़ा

Mon, 17 Aug 2026 12:02 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी में कोटेदारों के फीडबैक की निगरानी अब ई-पॉस से होगी। इसके शुभारंभ पर सीएम योगी ने कहा कि पहले ‘कोटेदार’ शब्द से ही लोगों को चिढ़ होती थी। अब बदलाव आया है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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कोटेदारों से सीएम योगी की बड़ी बात। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ में सोमवार को लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी के तहत ई-पॉस आधारित उचित दर विक्रेता फीडबैक प्रणाली का शुभारंभ किया। इस मौके पर सीएम ने बटन दबाकर उत्तर प्रदेश के 78 हजार से अधिक उचित दर विक्रेताओं के लाभांश में हुई वृद्धि (90 रुपये से बढ़ाकर 125 रुपये प्रति कुंतल) का उपहार दिया। कहा कि मार्जिन मनी में 35 रुपये की वृद्धि (10 रुपये केंद्र सरकार व 25 रुपये राज्य सरकार) से आपने लंबी छलांग लगाई है। हमने 25 रुपये और बढ़ाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा है। समय लगेगा, लेकिन यह कार्य हो गया तो आपके लिए और भी अच्छी व्यवस्था होगी।

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सीएम योगी ने कोटेदारों से अपील की कि वह कार्य करिये, जिसमें सम्मान हो। जिसमें सम्मान न हो, वह कार्य कभी नहीं करना चाहिए। इससे पीढ़ियां खराब होती हैं, उन पर दुष्प्रभाव पड़ता है। अब कोई आप पर अंगुली नहीं उठा सकता। 2017 के पहले सपाई गरीब का राशन कार्ड अपने घर में रख लेता था, इससे वह भूख से मरता था। अब ऐसी स्थिति नहीं है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के जरिये प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को लगातार निःशुल्क राशन मिल रहा है। निराश्रितों/दिव्यांगों का राशन घर तक पहुंचाने की व्यवस्था हो रही है। दो करोड़ परिवारों को फ्री में रसोई गैस के कनेक्शन, 1.53 करोड़ परिवारों को फ्री में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। राशन की 10 हजार दुकानों को अन्नपूर्णा भवन के रूप में स्थापित किया गया है।  

पहले कोटेदार नाम से लोगों को होती थी चिढ़ 

सीएम ने कहा कि आप 2017 से पहले भी मेहनत करते थे, लेकिन शासन राशन नहीं भेजता था तो गाली आपको खानी पड़ती थी। उनकी लूट का खामियाजा आपको भुगतना पड़ता था। लोग शक की निगाहों से देखते थे। कोटेदार शब्द से ही लोगों को चिढ़ सी होने लग गई थी। गलती आपकी नहीं थी। पाप कोई करता था, भुक्तभोगी कोई और होता था। उस समय सत्तासीन लोगों की नीयत में खोट था। उनके भ्रष्ट आचरण की आंच से चाहकर भी आप स्वयं को बचा नहीं सकते थे, जिससे उस समय यूपी की 20-22 करोड़ की आबादी शक की निगाहों से देखी जाती थी। 

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सीएम ने बेसिक शिक्षा परिषद का जिक्र किया। कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि स्कूल का वीडियो बनाएंगे, अरे! जरूर बनाओ। हमने ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से हर स्कूल की अच्छी फ्लोरिंग कराई। सरकार बालक-बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट, पेयजल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, फर्नीचर, 1.60 करोड़ बच्चों को बैग, किताबें, दो यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर आदि सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। साल 2017 के पहले स्कूल का भवन नहीं होता था। यदि भवन था तो शिक्षक नहीं, शिक्षक थे तो छात्र नहीं। पेयजल, टॉयलेट न होने से सत्र पूरा होने से पहले ही आधे बच्चे पहले ही स्कूल छोड़कर चले जाते थे। अब निपुण भारत अभियान के तहत यूपी के स्कूली बच्चे अक्षर ज्ञान के साथ ही वाक्य विन्यास में भी पारंगत हुए हैं। विज्ञान, अंग्रेजी, गणित की शिक्षा भी स्कूल में लेते हैं। बच्चे अब अच्छा कर रहे हैं। 

जो कुछ नहीं कर पाए, वे आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं 

सीएम ने समाजवादी पार्टी का नाम लिए बिना निशाना साधा। कहा कि जो लोग कुछ कर नहीं पाए, वे आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं। ऐसे लोग परिवर्तन को नकारात्मकता में बदलना चाहते हैं। यही स्थिति आप सभी के साथ भी हुई। उचित दर विक्रेताओं के बारे में लोगों की धारणा ठीक हो, इसके लिए सरकार ने वर्ष 2017 में ई-पॉस मशीन लगाना शुरू किया। हमने कहा कि सिंगल डोर स्टेप होगा यानी एफसीआई के गोदाम से सीधे फेयरप्राइस शॉप तक राशन पहुंचाया जाएगा। सरकार व उचित मूल्य विक्रेता के बीच में कोई बैरियर नहीं रहेगा। हम सीधे संवाद बनाएंगे, इससे परिणाम भी सकारात्मक आए। 
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39 प्रकार के आइटम की कर सकते हैं बिक्री

सीएम ने कहा कि उचित दर विक्रेता से जुड़ी दुकान को अन्नपूर्णा भवन के रूप में निर्मित किया जा रहा है। इस वर्ष इस मद में 500 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहां दुकान व गोदाम की भी व्यवस्था होगी। पहले आप केवल राशन की ही बिक्री कर पाते थे, लेकिन अब 39 ऐसे आइटम हैं, जिन्हें आप अपनी दुकानों से बेच सकते हैं बशर्ते वह नशीले/ज्वलनशील पदार्थ या देश/समाज के प्रतिकूल आचरण से जुड़े सामान न हों। 

सीएम ने कहा कि पहले सरकार ही लूट मचाती थी तो परिवर्तन कैसे हो पाता। फेयर प्राइस शॉप संचालकों को कोसने भर से परिवर्तन नहीं होता। प्रदेश में अब खाद्य व रसद विभाग में भी व्यापक रिफॉर्म हुआ है। 2017 में जनता दर्शन में यदि हजार प्रार्थना पत्र आते थे तो इसमें से लगभग 300 एप्लीकेशन राशन से जुड़ी विसंगतियों को लेकर होती थी लेकिन अब राशन वितरण की एक भी शिकायत नहीं आती है। यही आपका सम्मान है। अब आपको कोई कटघरे में नहीं खड़ा कर सकता और न ही कोई ऊल-जुलूल बातें करता है। 

कोरोना के दौरान भी कोटेदारों की नहीं आई एक भी शिकायत

सीएम ने कोटेदारों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान भी आप राशन वितरित कर रहे थे। जब सारा काम-धंधा बंद हुआ तो हमने दाल, नमक और तेल का वितरण शुरू किया। सभी जगह सुचारु वितरण हुआ, कहीं से एक भी शिकायत नहीं आई और हर गरीब तक सामान पहुंचा। इसका मतलब पूर्ववर्ती सरकार की नीयत खराब थी। वे आपका इंसेंटिव भी नहीं बढ़ाते थे।
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