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ईद और अलविदा में घर में ही अदा करें नमाज

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लखनऊ। इदारा-ए-शरिया दारुल इफ्ता वल कजा फिरंगी महल के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती अबुल इरफान मियां फरंगी महली ने फतवा जारी कर अलविदा जुमा और ईद में नमाज अपने घरों में अदा करने का एलान किया है। हालांकि दारुल उलूम फरंगी महल के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली इस संबंध में पहले ही फतवा जारी कर चुके हैं। वहीं, रविवार को रमजान के 23वें रोजे में घरों में इबादत का सिलसिला चलता रहा। रोजेदारों ने इफ्तार के वक्त अपने गुनाहों से माफी मांगी।   लॉकडाउन में ईदगाह, जामा मस्जिद में नमाज पढ़ने पर पाबंदी होने की वजह में ईद उल फितर की नमाज के संबंध में टिकैतगंज के सैयद अहमद नदीम की ओर से पूछे सवालों का जवाब देते हुऐ मुफ्ती इरफान मियां फिरंगी महली ने फतवा जारी कर कहा कि ईदगाह या जामा मस्जिद (जिस मस्जिद में जुमां की नमाज होती हो) के अलावा किसी भी जगह ईद की नमाज मुमकिन नहीं है। कहा कि मुसलमान अगर चाहे तो अपने  घरों पर 2 रकात या 4 रकात (मुस्तहब ) नफिल नमाज शुकराना अकेले-अकेले पढ़ सकते है। यह नमाज सुबह 6:30 बजे से लेकर 11: 30 बजे दिन से पहले ही अदा करनी है। ईद की खुशी में लोगों से गले मिलने और मुसाफा करने से परहेज करें।   शिया समुदाय 75 रुपये प्रतिव्यक्ति अदा करे फितरा   लखनऊ। शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी कहा कि इस बार शिया समुदाय प्रतिव्यक्ति के हिसाब से 75 रुपये फितरा की रकम अदा करनी होगी। मौलाना ने कहा कि फितरा, जिसे जकात फितरा भी कहा जाता है, इस्लाम में पूजा अनिवार्य कामों में से एक है। गरीबों और जरूरतमंदों को फितरा देना अनिवार्य है, जिसकी मात्रा एक साथ (करीब 3 किलोग्राम गेहूं, जौ, खजूर या किशमिश या उनका मूल्य, प्रत्येक बालिग और समझदार व्यक्ति, जो पूरे वर्ष अपने और अपने परिवार पर खर्च उठाता हो, वह अपने और अपने परिवार का फितरा भुगतान करने के लिए वाजिब (जरूरी) है। 
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