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मंदिर-मस्जिद के नाम पर सियासी लीडर लोगों को बेवकूफ बना रहे : फारूख अब्दुल्ला

Sat, 17 Nov 2018 06:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि भगवान राम सिर्फ हिंदू या मुसलमान के नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के हैं। राम-रहीम कभी खतरे में थे न कभी खतरे में आएंगे।

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मंदिर-मस्जिद के नाम पर सियासी लीडर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं। वे शनिवार को राजधानी में ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस (एआईपीसी) की ओर से आयोजित ‘आज का भारत’ विषयक संगोष्ठी में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि शेख अब्दुला के कारण कश्मीर भारत का हिस्सा बना। जम्मू कश्मीर में 70 फीसदी मुसलमान थे, लेकिन उन्होंने कहा कि हम गांधी के हिंदुस्तान में रहना चाहते हैं। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई व बौद्ध सब एक हैं। अब इस भावना को तोड़ा जा रहा है।
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सियासी लोग बांटों और राज करो की नीति पर चलकर धर्म, जाति, उपजाति के नाम पर लोगों में फूट डाल रहे हैं। राम के नाम पर भी यही किया जा रहा है। राम सिर्फ हिंदुओं के नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के हैं। राम को मानो या अल्लाह को, बात एक है।

कहा, खतरे में राम-रहीम नहीं, देश के लीडर हैं। वे मंदिर-मस्जिद के नाम पर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं। मैं हिंदुस्तान में पैदा हुआ, यहीं पला-बढ़ा और यहीं मरूंगा। हम हिंदुस्तानी हैं और हिदुस्तानी रहेंगे। जिस दिन हम पहचान लेंगे कि भगवान मेरा या तेरा नहीं होता, भगवान और खुदा मंदिर-मस्जिद में नहीं, लोगों के दिलों में रहता है, उस दिन मजहबों की नफरत मिट जाएगी। गोष्ठी का संचालन देश के पूर्व सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह ने किया। 

गल्तियों से उलझी कश्मीर समस्या

डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर को लेकर कई गलतियां हुई हैं। पहली गलती 1947 में हुई जब कश्मीर को लेकर पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया। उस समय लार्ड माउंटबेटन ने दोनों देशों की लड़ाई को रुकवा दी क्योंकि दोनों देशों की सेना में अंग्रेज अफसर थे। वे नहीं चाहते थे कि इस लड़ाई में अंग्रेज मारे जाएं। इससे एक कश्मीर हमारे पास आ गया और दूसरा पाकिस्तान के पास चला गया। जबकि पूरा कश्मीर महाराज हरि सिंह की रियासत था। दूसरी गलती हमने संयुक्त राष्ट्र संघ में युद्ध के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराकर की।

अमेरिका ने दोनों मुल्कों को एक साथ रखा और मुद्दे को लटका दिया। यूएन ने भी भारत-पाक को अपने-अपने हिस्से के कश्मीर पर काबिज रहने और शांति होने पर जनमत संग्रह की बात की, लेकिन यह प्रस्ताव आज तक अटका है। अब समस्या का समाधान यही है कि हमारा कश्मीर हमारे पास और पाक अधिकृत कश्मीर उसके पास रहे। एक दिन दोनों देशों को इसी फॉर्मूले पर जाना पड़ेगा। पूर्व पीएम अटल विहारी वाजपेयी समस्या के हल के लिए इस फॉर्मूले पर आगे बढ़े थे। पर बात आगे नहीं बढ़ सकी। अब स्थिति ये है कि भारत सरकार इस मुद्दे पर झुकना नहीं चाहती है, लेकिन पाक पीएम इमरान खान 2019 के आम चुनाव के बाद इस फॉर्मूले पर पहल करना चाहते हैं। 
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आजाद व किदवई के बाद मुस्लिम लीडरशिप नहीं उभरी

डॉ. फारूख ने कहा, मौलाना आजाद और रफी अहमद किदवई के बाद हिंदुस्तान में मुस्लिम लीडरशिप नहीं उभर सकी। इसकी वजह मक्खनबाजी रही। जो नेता उभरे भी वे जी-हुजूरी में लगे रहे। लीडर वह है जो सही बात निडर होकर कहे।
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