बेमौसम बारिश से हुई फसल बर्बादी व ऊपर से कर्ज के बोझ तले दबे दो किसानों ने शनिवार देर रात को अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। बाराबंकी में हैदरगढ़ तहसील के ग्राम भुलभुलिया मजरे दतौली चंदा निवासी एक किसान ने कर्ज से परेशान होकर जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य गेट के सामने पेड़ पर फांसी का फंदा लगा जान दे दी।
वहीं सुल्तानपुर में फसल बर्बाद होने से परेशान किसान ने शनिवार रात अपने ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर घर के बाहर आत्मदाह कर लिया।
बाराबंकी के हैदरगढ़ कोतवाली के ग्राम भुलभुलिया मजरे दतौली चंदा निवासी किसान आशाराम (36) पुत्र स्व. प्यारेलाल शनिवार सुबह करीब आठ बजे पत्नी गीता देवी को जिलाधिकारी से मिलने की बात कह कर घर से निकला था।
लेकिन शनिवार की रात ही आशाराम ने जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य गेट के सामने लगे पेड़ पर फंदे से लटककर जान दे दी।
मृतक की जेब में मिला सुसाइट नोट
रविवार भोर करीब साढ़े पांच बजे एडीएम के नौकर ने पेड़ से लटके शव को देख जानकारी एडीएम को दी। सुबह करीब 5.50 बजे एडीएम प्रेम प्रकाश पाल मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आनन-फानन शव को उतरवाया और कोतवाली लेकर चली गई।
प्रत्यक्षदर्शी वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि पेड़ के नीचे पांच रुपये का एक व एक रुपये के तीन सिक्के और पेन पड़ा हुआ था। मृतक की जेब से कुछ कागज व दो पन्ने का सुसाइड नोट भी मिला है।
मृतक (आशाराम) के साले नीरज, जगजीवन राम व राकेश कुमार ने बताया कि जीजा के पास करीब पक्का पांच बीघा जमीन है।
आशाराम ने तीन-चार बैंकों व स्थानीय सूदखोरों से करीब आठ से दस लाख रुपये का कर्ज ले रखा था। सुसाइड नोट में भी लिखा है कि उसके ऊपर विभिन्न बैंक व सूदखोरों का कर्ज है। उसकी कुछ जमीन का गांव के ही एक व्यक्ति ने इकरारनामा करा लिया था। और अब एक दूसरा व्यक्ति उस पर जमीन बैनामा करने का दबाव बना रहा है।
मृतक के परिवार को दिया सात लाख का चेक
एडीएम पीपी पाल ने भी मृतक किसान के कर्ज में डूबे होने की पुष्टि की है। आशाराम के घर पहुंचे जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने बताया कि मृतक के परिवार को सात लाख रुपये की राहत चेक मुख्यमंत्री राहत कोष से दी गई है।
उधर सुल्तानपुर में फसल बर्बाद होने से परेशान चल रहे जयसिंहपुर थाना क्षेत्र के नरायनपुर बरौंसा गांव निवासी करीब 62 वर्षीय किसान मथुरा प्रसाद वर्मा ने शनिवार रात अपने ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर घर के बाहर आत्मदाह कर लिया।
परिवार व पास पड़ोस वाले जब तक उसे बचाने दौड़ते उसकी मौत हो चुकी थी। परिवारीजनों का कहना है कि फसल बर्बाद होने से मथुरा प्रसाद वर्मा काफी परेशान चल रहे थे।
मौके पर कोई राजस्व अधिकारी नहीं पहुंचा था। एसडीएम जयसिंहपुर शिव बहादुर का कहना है कि किसान की मौत की जांच कराई जा रही है। मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।