लखनऊ। राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान विकसित कृषि संकल्प के दूसरे दिन शनिवार को वैज्ञानिकों ने माल, मलिहाबाद और बीकेटी में पहुंचकर किसानों से सीधा संवाद किया। किसानों की समस्याएं जानीं और उनका समाधान किया। प्राकृतिक खेती व बेहतर तकनीक का इस्तेमाल करने परजोर दिया। विभागीय योजनाओं की भी जानकारी दी।
विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत बीकेटी के नगवामऊ खुर्द, मानपुर लाला और कौड़ियामऊ में कृषक-वैज्ञानिक संवाद हुआ। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमान खेड़ा के निदेशक टी. दामोदरन ने केला और जैविक खेती के बारे में किसानों को जानकारी दी और उसके फायदे बताए। उपनिदेशक कृषि विनय कुमार कौशल ने खेती के प्राकृतिक तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ राम रतन वर्मा, डॉ आर पी साहू, डॉ. श्वेता ने नई तकनीकों व अनुसंधानों से अवगत कराया। एडीओ कृषि विजय प्रकाश निगम ने विभागीय योजनाओं के बारे में बताया। इस दौरान 600 किसान मौजूद रहे। (संवाद)
आम के बागों में न करें ज्यादा जुताई
मलिहाबाद। जौरिया, रुसेना, फतेहपुर गांव पहुंचकर वैज्ञानिकों ने किसानों से संवाद किया। ग्राम जौरिया के किसान हरिशंकर मौर्य, सोहन लाल, चुन्ना, मुल्कराज ने महंगे बीज व आम के पेड़ों के सूखने की समस्या बताई तो फतेहपुर गांव निवासी जगदीश ने खेत में बीज डालने से पूर्व खेत को तैयार करने की जानकारी ली। वैज्ञानिक डॉ. अंशुमान ने बताया कि बागों को अत्यधिक जुताई कराने से बचना है क्योंकि अधिक जुताई से पेड़ो की जड़े कटने का खतरा होता है। जड़ कटने से पेड़ सूखने लगता है।