गन्ना मूल्य निर्धारण के लिए शुक्रवार को आयोजित बैठक में किसानों ने मौजूदा पेराई सत्र के लिए 400 रुपये कुंतल रेट तय करने की मांग की। इसके विपरीत यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन ने कहा कि गन्ना मूल्य में वृद्धि न की जाए। चीनी मिलों को तीन किस्तों में गन्ना मूल्य भुगतान की इजाजत दी जाए।
गन्ना एवं चीनी आयुक्त संजय आर. भूसरेड्डी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्रगतिशील किसानों के साथ ही शुगर इंड्स्ट्री के प्रतिनिधि, गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर के वैज्ञानिक मौजूद रहे। गन्ना शोध परिषद के निदेशक ने गन्ना उत्पादन लागत के संबंध में अपनी रिपोर्ट आयुक्त को सौंपी। सूत्रों के मुताबिक शोध परिषद ने गन्ने की उत्पादन लागत का आकलन 300 रुपये प्रति कुंतल किया है।
शाहजहांपुर के कौशल किशोर, लखीमपुर के कल्बे हसन, पिपराइच के वीरेन्द्र प्रताप सिंह और फरीदपुर, बरेली के विशाल चौधरी ने गन्ना लागत का हवाला देते हुए 370 से 430 रुपये कुंतल तक गन्ना मूल्य की मांग की। किसानों का कहना था कि पिछले दो सालों में गन्ना मूल्य में वृद्धि नहीं की गई है। किसानों को समय से गन्ना मूल्य का भुगतान भी नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा तीन सालों में लागत में बेतहाशा वृद्धि को देखते हुए गन्ना मूल्य 400 रुपये कुंतल घोषित किया जाए।
चीनी मिलों की ओर से यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन के महासचिव दीपक गुप्तारा ने लिखित व मौखिक रूप से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि चीनी की उत्पादन लागत 3450 रुपये प्रति कुंतल है जबकि चीनी की बिक्री औसतन 3220 रुपये प्रति कुंतल की दर हो रही है। इस तरह चीनी उत्पादन से मिलों को 230 रुपये प्रति कुंतल का घाटा हो रहा है। पेराई सत्र 2020-21 में देश में चीनी उत्पादन 310 लाख टन होने का अनुमान है। इससे चीनी के रेट और नीचे आने की उम्मीद है।
उन्होंने मांग की कि चालू पेराई सीजन 2020-21 के लिए गन्ना मूल्य न बढ़ाया जाए। गन्ना मूल्य भुगतान तीन किस्तों में देने की व्यवस्था की जाए, ढुलाई भाड़ा वास्तविक लिया जाए और रिजर्व शीरे की खरीद बाजार भाव से की जाए। इसके अलावा उन्होंने चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य 3100 रुपये क्विंटल को बढ़ाने की मांग की है यह भी कहा है कि केंद्र सरकार ने 2020-21 की निर्यात नीति जल्द जारी कराई जाए। दीपक गुप्तारा ने यह भी कहा कि सहकारी गन्ना समितियों का कमीशन प्रति कुंतल दो रुपये निर्धारित किया जाए।