किसानों के आंदोलन का मुद्दा पूरी तरह शांत किए बिना पंचायत चुनाव में उतरना भाजपा के लिए अच्छा नहीं रहेगा। क्योंकि गांवों के विकास के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं जैसे उज्ज्वला गैस कनेक्शन, कोरोना काल में मुफ्त अनाज व गांव में लोगों को रोजगार, हर घर नल, गरीबों को निशुल्क बिजली कनेक्शन, प्रवासी श्रमिकों को सहायता जैसे कामों से पार्टी को हासिल हुए समर्थन पर भी संकट खड़ा हो जाएगा। वहीं, कार्यकर्ताओं को किसानों से जुड़े मुद्दों पर लोगों के सामूहिक सवालों का जवाब देना पड़ेगा, इसके लिए भी तैयारी जरूरी है।
लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक भाजपा की जीत का एक प्रमुख कारण सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे लोगों के खाते में पहुंचाने और उनसे संवाद का प्लेटफार्म तैयार करने में सफलता हासिल कर लेना है। भाजपा नहीं चाहती है कि कोई ऐसी चूक हो, जिससे तमाम मेहनत के बाद पार्टी के पक्ष में बना माहौल बिगड़ जाए। इसलिए भाजपा की कोशिश है कि मंडल व जिलों की बैठकों और व्यक्तिगत संपर्क व संवाद के जरिये किसान आंदोलन के ताप को धीरे-धीरे ठंडा किया जाए। साथ ही केंद्र व प्रदेश सरकार की तरफ से गांव, ग्रामीण और किसानों के लिए किए कामों का विवरण तैयार कराकर लोगों को बताया जाए। सीधे चुनाव को लेकर अभियान तब शुरू किया जाए, जब किसानों का मुद्दा पूरी तरह सुलझ जाए।