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अमर उजाला खबर का असर, लेखपाल ने किसान का खसरा बदला तब हुयी धान की खरीद

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जिम्मेदारों की लापरवाही का खमियाजा भुगत रहे किसान रामनाथ के चेहरे पर उस समय मुस्कान देखने को मिली जब अमर उजाला के प्रयास से उसके सम्पूर्ण धान की तौल हो गई। अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित ‘बिना स्थलीय निरीक्षण के खसरा तैयार कर रहे लेखपाल’ शीर्षक से खबर का उच्चाधिकारियों ने संज्ञान लिया और क्षेत्रीय लेखपाल शैलेश को स्थलीय निरीक्षण कर किसान का खसरा दुरस्त करने के आदेश दिए।
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मंगलवार को लेखपाल ने किसान की जमीन का स्थलीय निरीक्षण किया और उसे नया खसरा बना कर दिया जिसमें सम्पूर्ण रकबे में हुई धान की फसल का विवरण दर्ज किया। किसान ने अमर उजाला को धन्यवाद देते हुए कहा कि अखबार ने अगर हमारा साथ न दिया होता तो हमारे पूरे धान की सरकारी तौल न हो पाती। इससे पहले लेखपाल ने बिना स्थलीय निरीक्षण के गलत खसरा बना दिया था जिसकी वजह से क्रय केंद्र पर उसके संपूर्ण धान की तौल करने से मना कर दिया गया था।
मालूम हो कि मनकौटी गांव निवासी किसान रामनाथ ने अपनी भूमि संख्या 38 रकबा 1.771 हैक्टेयर(7 बीघे से अधिक) पर धान की उपज की थी। जिसे बेचने के लिए उसने सरकारी बेवसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराया था। जहा से उसे जमीन के हिसाब से 109 कुंतल धान बेचने की स्वीकृति प्रदान हुयी। उसके बाद किसान ने अमानीगंज स्थित क्रय केन्द्र पर सम्पर्क किया और प्रभारी को धान का सैम्पल दिखया। सैम्पल देखने के बाद क्रय केन्द्र प्रभारी शशि सिंह ने उसे सोमवार को धान लाने का टोकन दे दिया गया। मगर जब वह क्रय केन्द्र पर धान लेकर पहुचा तो पहले उसे यह बात कहकर टरकाया गया कि धान हैविरेड है इसका प्रमाण पत्र लाकर दो। सरकारी सिस्टम की गुणा गणित से अन्जान किसान ने एसडीएम अजय रॉय दरवाजा खटखटाया तो उन्होंने उसे भतोषा दिया कि तुम्हारे धान की तौल की जाएगी आपको किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नही है। जिसके बाद उन्होंने केन्द्र प्रभारी से बात कर किसान के धान की तौल करने को कहा। एसडीएम के आदेश पर केन्द्र प्रभारी ने किसान के द्वारा दिये गए खसरे के हिसाब से 33कुंतल 20 किलो धान की खरीद कर तो ली। मगर फिर भी उसका 12 कुंतल 40 किलो धान बच गया। जिसे लिए वह पूरी रात केन्द्र पर पड़ा रहा। किसान का आरोप था कि स्वीकृति 109 कुंतल धान बेचने की मिली है और हमारा कुल कुल धान 45 कुंतल 60 किलो ही फिर क्यों पूरा धान नही लिया जा रहा है। किसान का कहना था कि गलती जिमेदारो की तो भुगते हम क्यो। जिसके बाद मंगलवार सुबह लेखपाल ने किसान का दूसरा खसरा जारी किया। उसके बाद किसान के सम्पूर्ण धान की खरीद हुयी। अपना धान बेचकर घर पहुचे
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