लखनऊ। कोविड-19 महामारी का दौर था। केजीएमयू के डॉक्टरों को अलग-अलग जिलों में कोविड प्रबंधन के लिए भेजा गया था। इस तैनाती के दौरान खबर आई कि केजीएमयू का कुलपति एक फौजी को बना दिया गया है। खबर के बाद ज्यादातर डॉक्टरों को डर था कि पहली बार एक फौजी कुलपति आ रहा है तो कैसा माहौल रहेगा। हालांकि ज्वाॅइनिंग के बाद यह डर दूर हो गया। केजीएमयू के फॉर्माकोलॉजी विभाग के डॉक्टर प्रो. आरके दीक्षित ने सेल्बी हाॅल में जब यह बात कही तो पूरा हाॅल ठहाकों से गूंज उठा। मौका था केजीएमयू के कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी के विदाई समारोह का।
केजीएमयू शिक्षक संघ की ओर से पहली बार किसी कुलपति के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में नई कुलपति घोषित की गईं प्रो. सोनिया नित्यानंद ने भी भाग लिया। शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. केके सिंह ने कहा कि कुलपति बिपिन पुरी के निर्देशन में केजीएमयू का काफी विस्तार हुआ है। महासचिव डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि डॉ. बिपिन पुरी ने इलाज के साथ शिक्षण कार्य के लिए बेहतर माहौल मुहैया कराया। कार्यक्रम में प्रतिकुलपति डॉ. विनीत शर्मा, सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार, डॉ. भास्कर अग्रवाल समेत ज्यादातर डॉक्टर मौजूद रहे।
केजीएमयू ने सिखाई हिंदी
कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने कहा कि केजीएमयू में सभी डॉक्टर और स्टाफ ने सहयोग किया। हालांकि यहां कामकाज हिंदी में होता है, इसलिए काफी समस्या हुई। विभागाध्यक्षों से अनुरोध किया कि फाइल को इंग्लिश में भी तैयार कराएं। समस्या यह थी कि स्टाफ को अंग्रेजी कम आती थी। इन सबके बीच काफी हिंदी सीख गया। उन्होंने शिक्षकों को अहं भुलाकर आपस में सहयोग करने के लिए कहा। सहयोग के लिए धन्यवाद तथा खुद के द्वारा कही गई बातों के लिए उन्होंने क्षमा भी मांगी।