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यूपी: बदमाश टिंकू कपाला का शव लेने से पिता का इनकार, 22 साल पहले तोड़ दिया था रिश्ता

Sun, 26 Jul 2020 12:29 PM IST
प्राची प्रियम माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
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कुख्यात टिंकु कपाला - फोटो : अमर उजाला
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‘टिंकू से मेरा और मेरे परिवार का कोई वास्ता नहीं है। हमने तो 22 साल पहले ही उससे रिश्ता तोड़ दिया था। टिंकू ने जो किया, उसका नतीजा उसे मिल गया। हमें उसके शव से भी कोई वास्ता नहीं है।’ यह शब्द हैं एक लाख रुपये के इनामी कुख्यात टिंकू कपाला के पिता तिलकराम श्रीवास्तव के। 

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शनिवार दोपहर जब एनकाउंटर में मारे गए टिंकू के शव की सुपुर्दगी के लिए पुलिस दिलाराम बारादरी स्थित उसके घर पहुंची तो पिता ने हाथ जोड़ लिए। बोले, न टिंकू से कोई संबंध बाकी रह गया था और न ही उसके शव से कोई वास्ता है। 

उन्होंने बेटे का शव लेने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, पुलिस उन्हें बहाने से अपने साथ चौक कोतवाली और फिर बाराबंकी ले गई जहां टिंकू का शव उनके सुपुर्द किया गया।
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टिंकू के परिवार में पिता के अलावा मां सीता, छोटा भाई विमल किशोर और एक बहन है। भाई ने बताया कि मां को कैंसर है और उन्हें टिंकू के एनकाउंटर में मारे जाने की कोई खबर नहीं है। उसने बताया कि दोपहर को पुलिस घर पर आई और टिंकू के बारे में बताया। 

हालांकि, उन्हें कल रात ही इस बारे में जानकारी मिल गई थी। पुलिस वालों ने बाराबंकी चलकर शव की सुपुर्दगी लेने के लिए कहा तो पिता ने उससे किसी भी तरह का वास्ता होने की बात से इनकार कर दिया। वह जाना भी नहीं चाहते थे, लेकिन पुलिस उन्हें बहाने से चौक कोतवाली और फिर बाराबंकी ले गई। 

पिता ने बताया कि टिंकू की वजह से उनका व परिवारीजनों का जीना हराम हो गया था। आए दिन पुलिस घर आकर टिंकू के बारे में पूछताछ करती थी। लखनऊ या उत्तर प्रदेश और बाहर के प्रदेशों में कोई भी लूट की वारदात होती तो पुलिस यहां आकर धमकाती थी। 

टिंकू के एनकाउंटर में ढेर होने पर विमल ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। पिता तिलकराम श्रीवास्तव ने जरूर कहा कि उसने जैसा किया, वैसा ही अंजाम सामने आया। उधर, मुहल्ले के लोगों को भी टिंकू के खात्मे से सुकून मिला। आसपास रहने वालों का कहना था कि उसकी वजह से मोहल्ला बदनाम हो गया था।
 

वजीरगंज में 21 साल पहले डकैती की वारदात से शुरू किया था अपराध का सफर

टिंकू उर्फ कपाला, उर्फ कमल किशोर उर्फ हेमंत कुमार उर्फ संजय उर्फ मामा... ये सब टिंकू के ही नाम थे। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि कुख्यात टिंकू अपना नाम बदलता रहता था। 

उसके खिलाफ वजीरगंज में 1998 में डकैती का पहला केस दर्ज है। इसके बाद से ही उसने अपना नाम कपाला रखा था। इसी वर्ष उसने महानगर में ताबड़तोड तीन लूट करके पुलिस की नाक में दम कर दिया था। तालकटोरा में भी एक डकैती की। वर्ष 2003 में नाका में दुस्साहसिक तरीके से एक कारोबारी को लूट लिया था। 

1990 से 2003 तक टिंकू पुलिस के दबाव के चलते अंडरग्राउंड हो गया था। इसके बाद उसने फिर राजधानी में लूटपाट की। वर्ष 2004 से 2008 तक वह फिर गायब हो गया। 2008 में गोसाईंगंज में लूट की वारदात की और अंडरग्राउंड हो गया।

इस दौरान उसने प्रदेश से बाहर अपना गैंग तैयार किया और वर्ष 2014 में पुणे में लूट की दो सनसनीखेज वारदातें कीं। अगले ही साल 2015 में उसने गुजरात के वडोदरा में लूट व हत्या का प्रयास कर सनसनी फैला दी। इसके बाद वह फिर चार साल के लिए गायब हो गया। 

वर्ष 2019 में उसने कृष्णानगर में आरके ज्वैलर्स के यहां दो हत्याएं करके डाका डालकर फिर सनसनी फैला दी। गोमतीनगर में भी उसने ग्वारी गांव निवासी परचून दुकानदार सोनू यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसने सोनू का रुपयों से भरा बैग लूटने का प्रयास किया था लेकिन सफलता नहीं मिली।

जल संस्थान में लगवाई थी नौकरी पर बेटे ने पकड़ लिया गलत रास्ता
टिंकू के पिता ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों से कहकर बेटे की आलमबाग जल संस्थान में चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी लगवाई थी। हालांकि, कुछ दिन बाद ही उसने काम पर जाना बंद कर दिया। उसे बदमाशी और रंगबाजी करने में मजा आता था। 
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दिनभर बाइक लेकर इधर-उधर टहलता रहता। छोटी-मोटी गुंडागर्दी और छीना-झपटी शुरू कर दी। नौकरी से निकाल दिया गया। उसे बहुत समझाया लेकिन वह नहीं माना। ऐसे में वर्ष 1997 में उसे परिवार से बेदखल कर दिया। 

उसकी शादी भी हुई थी और एक बेटा भी है। हालांकि, अपराध में लिप्त होने के चलते पत्नी उसे छोड़कर चली गई। टिंकू का बेटा इस वक्त करीब 28 साल का है।

पुलिस 12 साल पहले आखिरी बार घर लेकर आई थी
तिलकराम श्रीवास्तव ने बताया कि टिंकू को करीब 12 साल पहले पुलिस आखिरी बार घर लेकर आई थी। इसके बाद से वह कभी यहां नहीं आया। हां, पुलिस उसे ढूंढ़ने और उसके बारे में पूछताछ के लिए अक्सर यहां आती रही। 

उन्होंने बताया कि वर्ष 2007 में टिंकू जेल से छूटा तो पुलिस उसे घर तक लेकर आई थी। टिंकू को परिवारीजनों के सुपुर्द किया लेकिन किसी ने भी उसे घर के भीतर नहीं आने दिया। टिंकू भी बाहर से ही चला गया था। फिर न कभी फोन पर बात हुई और न ही किसी अन्य माध्यम से उसने संपर्क किया।
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