रायबरेली के गंगातट डलमऊ के श्मशान घाट से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। तेज हवा और बारिश का मौसम देखकर परिजन अधजला शव छोड़कर अपने-अपने घर वापस लौट गए। पूरी रात शव को श्मशानघाट पर कुत्ते नोचते रहे।
जानकारी मिलने पर तीर्थ पुरोहितों ने अध जले शव को फिर से चिता जला कर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। श्मशान घाट के तीर्थ पुरोहितों ने बताया कि शनिवार को लगभग शाम 5 बजे रायबरेली शहर के सत्य नगर से एक शव को लेकर आए परिजनों ने चिता को आग लगाई और वापस घर लौट गए।
कुछ ही देर में तेज हवाएं और बारिश होने लगी, जिससे चिता की आग बुझ गई और शव अध जला ही रह गया। इससे पूरी रात श्मशान घाट पर आवारा कुत्ते शव को नोंचते रहे। रविवार सुबह तीर्थ पुरोहितों को जानकारी मिलने पर अध जले शव की चिता को आग लगाकर अंतिम संस्कार किया गया।
सबसे ज्यादा डलमऊ घाट पहुंच रहे शव
कोरोना कहर के बाद सबसे ज्यादा शव डलमऊ श्मशान घाट पहुंच रहे हैं। यहां पर किसी दिन 40 या फिर 50 और किसी दिन यह आंकड़ा 100 तक पहुंच रहा है। ऊंचाहार क्षेत्र के गोकना श्मशान घाट पर 15 से 20 और सरेनी के गेगासो श्मशान घाट पर 20 से 25 शवों को हर दिन अंतिम संस्कार के लिए पहुंचाया जाता है। हर दिन यह आंकड़ा कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है।