अफसर सिर्फ वादे कर रहे हैं और चेतावनियां दे रहे हैं, लेकिन प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा के वाकये थम नहीं रहे।
नोएडा, मेरठ, मुरादाबाद, कानपुर नगर में हाल में हुए सांप्रदायिक संघर्ष को लेकर उठे सवालों का जवाब देने का सिलसिला अभी थमा नहीं था कि अब राजधानी में हिंसक संघर्ष हो गया।
ऐसे माहौल में सरकार के जिम्मेदारी अधिकारी बार-बार ऐसी वारदात को रोकने के दावे करते नहीं थक रहे।
राज्य के मुख्य सचिव इस बात की चेतावनी दे चुके हैं कि जिस जिले में सांप्रदायिक संघर्ष होगा, वहां के डीएम व एसपी इसके लिए जिम्मेदार माने जाएंगे।
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी के इस बयान पर भी फिलहाल कोई अमल नहीं हुआ है। समाजवादी पार्टी की सरकार में अब तक 40 से अधिक दंगे और हिसंक संघर्ष हो चुके हैं।
सांप्रदायिक संघर्ष व गुटीय हिंसा की लगातार वारदात हो रही हैं, लेकिन कहीं भी अधिकारियों की ढिलाई के लिए किसी को दोषी नहीं माना गया न किसी के खिलाफ कार्रवाई हुई।
कानून-व्यवस्था पर सरकार का पक्ष रखने के दौरान बुधवार को आईजी कानून-व्यवस्था आरके विश्वकर्मा और विशेष सचिव गृह जेपी त्रिवेदी ने कहा कि संघर्ष पर फौरन काबू पा लिया गया था।
आईजी कानून-व्यवस्था ने यह तो माना कि संघर्ष में पथराव हुआ आठ से अधिक वाहनों को आग लगा दी गई, कुछ दुकानों में लूट-पाट हुई पर फायरिंग होने की बात को वह नकार गए।
हिंसा पर जिले के अफसरों पर कार्रवाई के बाबत मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की चेतावनी पर अफसर चुप्पी साध गए।
दोनों अधिकारियों ने यही कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है।