मेरठ परिक्षेत्र में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों ने अप्रैल 2013 से फरवरी 2014 के बीच 450 बसों को कागजों पर 50 लाख किलोमीटर दौड़ा दी।
इतना नहीं क्षेत्रीय प्रबंधक इन आंकड़ों को परिवहन मंत्री के सामने समीक्षा बैठक में भी पेश कर चुके हैं।
दरअसल डीज़ल खर्च का बेहतर औसत दिखाने के लिए मूल आंकड़ों में की गई हेराफेरी का खुलासा नोडल अफसर एसके बनर्जी और वर्तमान क्षेत्रीय प्रबंधक पीआर बेलवरिया की संयुक्त जांच में हुआ है।
इस हेराफेरी में दो क्षेत्रीय प्रबंधक फंसते नजर आ रहे हैं। खुलासे के बाद निगम के प्रबंधक निदेशक मुकेश कुमार मेश्राम ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
क्षेत्रीय प्रबंधक बेलवरिया ने बताया कि मेरठ परिक्षेत्र में निगम की कुल 450 बसों का संचालन सोहराब गेट, मेरठ, भैनाली, बड़ौत व गढ़ डिपो से होता है।
इन्हीं बसों का अप्रैल 2013 से फरवरी 2014 तक डीजल का औसत खर्च अधिक दर्शाया गया है।
यानी एक बस के एक महीने में कुल अर्जित किलोमीटर को सरकारी दस्तावेज में बढ़ा-चढ़ाकर अव्वल प्रगति रिपोर्ट हासिल कर ली।
आंकड़ों में यह हेराफेरी मेरठ परिक्षेत्र के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक संदीप लाहा व डीबी सिंह के कार्यकाल में हुई।
फिलहाल लाहा ने मेरठ सिटी बस के प्रबंध निदेशक व डीबी सिंह चित्रकूटधाम परिक्षेत्र की कमान संभाल रखी है।
डीज़ल में हेराफेरी की होगी जांच
मेरठ परिक्षेत्र के पांच डिपो में सरकारी दस्तावेज पर साल भर में 450 बसों को 50 लाख किलोमीटर चलाए जाने के मामले की जांच वित्त नियंत्रक कृष्ण चंद करेंगे।
इसके लिए वित्त नियंत्रक जांच टीम के साथ जल्द ही मेरठ जाएंगे और रिपोर्ट प्रबंध निदेशक को सौंपेंगे।