नेपाली युवकों व दलालों को सेना भर्ती होने के लिए फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र देने वाले तीन युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एटीएस की टीम ने शुक्रवार को वाराणसी से इन्हें पकड़ा।
पिछले दिनों वाराणसी से ही गिरफ्तार किए गए दिलीप व चंद्रहादुर नाम के दो नेपाली युवकों ने पुलिस की पूछताछ में इन तीनों के नाम बताए थे। तभी से एटीएस इनकी तलाश में थी।
गिरफ्तार किए गए युवकों में अजय कुमार सिंह, नागेश्वर मौर्या व अवध प्रकाश मौर्य शामिल हैं। ये तीनों वाराणसी के ही रहने वाले हैं और कचहरी के पास इनकी फोटोस्टेट की दुकान है।
यह जानकारी एटीएस के आईजी असीम अरुण ने दी है। वाराणसी के शिवपुर स्थित साईंधाम कॉलोनी में रहने वाले नागेश्वर की कचहरी के पास फोटोस्टेट की दुकान है।
अवध प्रकाश मौर्य यहीं नौकरी करता है और यहीं से अजय सिंह के साथ मिलकर फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र बनवाता है। अवध प्रकाश व अजय मिलकर फर्जी मार्क्सशीट और प्रमाणपत्र तैयार कराते थे।
आईजी ने बताया कि पूछताछ में तीनों ने फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र बनवाने की बात कबूली है। अजय पूर्व में एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए चंद्र बहादुर खत्री का प्रमुख दलाल है जो खत्री को फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र उपलब्ध कराता है।
एक मार्क्सशीट व सनद बनवाने के बदले चंद्रबहादुर अजय को 1500 रुपये देता था, जिसमें से अवध प्रकाश को भी 3 से 4 सौ रुपये मिलते थे।
गौरतलब है कि पुलिस की गिरफ्त में आया चंद्र बहादुर हाईस्कूल और इंटर का सर्टिफिकेट बनवाकर नेपाली युवकों को सेना में भर्ती कराने का धंधा करता था।
गिरफ्तार तीनों युवकों के पास से कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, हाईस्कूल व इंटर की मार्क्सशीट, प्रमाण पत्र, जिला विद्यालय निरीक्षक आजमगढ़ के नाम से बनी मुहर तथा इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य के नाम की बनी मुहर बरामद किए गए हैं।