कर चोरी में शामिल फर्मों की ई-वे बिल जनरेट करने की सुविधा निरस्त कर उनका जीएसटीआईएन रद्द किया जाएगा। मुख्यालय स्तर पर ऐसी फर्मों की सूची तैयार करने के साथ ही वाणिज्य कर विभाग ने सभी जोन के एडिशनल कमिश्नरों और विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) के एडिशनल व ज्वाइंट कमिश्नरों निर्देश भेज दिए हैं।
मुख्यालय स्तर पर कर चोरी रोकने के लिए रिसर्च सेल का गठन किया गया है। इस सेल ने पिछलों दिनों कई फर्मों के बिल-बाउचर की जांच की, जिसमें जीएसटी चोरी का खेल पकड़ा गया। बड़े पैमाने पर बोगस इन्वायस पर टैक्स चोरी करने वाले भी पकड़े गए हैं। इनमें 17 प्रदेशों में पंजीकृत 142 फर्जी फर्मों में से 56 फर्म यूपी की हैं, जिनके फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
जोन स्तर पर प्रवर्तन कार्य से जुड़े अधिकारी चिह्नित फर्मों का जीएसटीआईएन निरस्त करने का सुझाव दे रहे थे, ताकि बोगस ई-वे बिल जारी करने पर रोक लगायी जा सके। अब विभाग ने ई-वे बिल से संबंधित पोर्टल पर ऐसा प्रावधान किया है कि खंड स्तरीय अधिकारी के पोर्टल पर फर्म का जीएसटीआईएन निरस्त करते ही उसकी ई-वे बिल जनरेट करने की सुविधा निरस्त हो जाएगी। इसके बाद फर्म संचालक पोर्टल को अपडेट नहीं कर पाएगा और फर्जीवाड़े पर रोक सकेगी।