सतांव। जतुआ-टप्पा सीएचसी में रोगी कल्याण समिति में मिली एक लाख रुपये से अधिक की धनराशि खर्च हो गई, लेकिन एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है। ओपीडी कक्षों के बाहर गर्मी से बेहाल मरीजों को इंतजार करना पड़ता है, लेकिन पंखे तक नहीं लगवाए गए हैं। अस्पताल में पीने के पानी और बैठने के बंदोबस्त नहीं हैं।
कागजों पर एफआरयू, सुविधाएं न के बराबर
बछरावां। सीएचसी को फर्स्ट रेफरर यूनिट (एफआरयू) का दर्जा दिया गया है, लेकिन सुविधाओं का अभाव है। रोगी कल्याण को मिले बजट के खर्च होने के बाद बेडों पर चादरों तक की व्यवस्था नहीं है। वार्ड में गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त बंदोबस्त नहीं किए गए हैं। अस्पताल में चहेती फर्मों को बजट का भुगतान करके खानापूरी कर ली गई है।
रायबरेली। जिले की 19 सीएचसी और 54 पीएचसी को रोगी कल्याण समिति के माध्यम से सुविधाएं मुहैया कराने के लिए 98 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी रोगी बेहाल हैं। अधीक्षकोंं ने बाबुओं व एनएचएम कर्मियों की फर्मों को मानकों के विपरीत भुगतान करके बजट को खर्च कर दिया, लेकिन अस्पतालों में सुविधाओं की व्यवस्था नहीं हो सकी। शिकायत मिलने के बाद सीएमओ ने फर्मों को भुगतान के संबंध में जांच के आदेश दिए हैं।
सीएचसी और पीएचसी में पेयजल, मरीजों के बैठने, सफाई, चादरों आदि की व्यवस्था के लिए हर साल रोगी कल्याण समिति के माध्यम से बजट दिया जाता है। यह बजट अधीक्षकों को अपने हिसाब से व्यवस्थाएं कराने में खर्च करना होता है। अधीक्षकों ने चहेती फर्मों के नाम बिना टेंडर व कोटेशन के ही भुगतान करके बंदरबांट कर लिया।
चर्चा तो यहां तक है कि कई अधीक्षकों ने फर्मों से सीधे अपने व संबंधियों के खातों में भुगतान भी वापस ले लिया है। लक्ष्य इंटरप्राइजेज, सुनीता इंटरप्राइजेज, प्रिया जिनेस, भाव्या इंटरप्राइजेज सहित अन्य फर्मों को भुगतान किया गया है। ये फर्में स्वास्थ्य कर्मियों या उनके संबंधियों के नाम संचालित हैं।
सीएचसी और पीएचसी को रोगी कल्याण समिति के माध्यम से दिए गए बजट के भुगतान के संबंध में चहेती फर्मों को भुगतान की शिकायतें मिली हैं। इस पर जिला अकाउंट प्रबंधक को जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ