पूर्व महिला सहकर्मी ने बताया कि एसयूवी किसी भी हादसे की शिकार नहीं हुई है। पुलिस की गोली लगने के बाद विवेक बेहोश हो गया तो गाड़ी अंडरपास की दीवार से टकरा गई। पुलिस ने दीवार से टकराने की बात लोगों को बताई, लेकिन गोली मारने की बात से इनकार करती रही।
सना ने बताया कि थाने में उसे काफी देर तक महिला सम्मान कक्ष में बैठाया गया। इस दौरान पुलिस के कई अधिकारी उससे पूछताछ करते रहे। इसी बीच एसएसपी व अन्य अधिकारियों के सामने उससे एक सादे कागज पर दस्तखत कराए गए। सुबह पता चला कि उसी दस्तखत वाले कागज पर पुलिस ने तहरीर लिखकर केस दर्ज कर लिया है। उसने साफ इंकार किया कि कोई तहरीर थाने में दी है। पुलिस ने अपनी मनमर्जी से तहरीर तैयार की और केस भी दर्ज किया।
पूर्व महिला सहकर्मी के मुताबिक, वह एसयूवी से बाहर निकली और चीख-चीखकर मदद की गुहार लगा रही थी। दर्जनों वाहन सवार लोग निकले, पर कोई मदद के लिए नहीं रुका। वह अंडरपास के दोनों तरफ से आने वालों के कार के सामने खड़ी होकर मदद के लिए हाथ जोड़ रही थी।
वह कार सवारों से मोबाइल मांग रही थी कि वारदात की सूचना अपने करीबी और ऑफिस के लोगों को दे, लेकिन किसी ने मोबाइल नहीं दिया। कुछ देर बाद खरगापुर की तरफ से एक पीआरवी (पुलिस रेंस्पॉन्स व्हीकल) अंडरपास के करीब पहुंची। उसे देख मदद की उम्मीद जगी तो पीआरवी के सामने आकर खड़ी हो गई। पीआरवी के जवानों ने इसकी सूचना थाने को दी। इसके बाद थाने में तैनात एसआई कुशल तिवारी अपनी टीम के साथ पहुंचे।
मूलरूप से बनारस की रहने वाली पूर्व महिला सहकर्मी के मुताबिक, विवेक एसयूवी में घायल तड़प रहा था। पुलिस ने उसे अपनी गाड़ी से अस्पताल भेजने के बजाय एंबुलेंस का इंतजार करती रही। 20 मिनट बाद जब एंबुलेंस आई तो विवेक की हालत काफी बिगड़ चुकी थी। विवेक को लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।