आलम के ठीक पीछे बने घर में रहने वाले 35 वर्षीय जैद ने बताया कि वह नहाकर बेड पर लेटे थे। इसके बाद धमाके शुरू हो गए। वह कुछ समझ पाते कि कमरे की बेड से लगी दीवार भरभराकर उन पर ढह गई और वह बेहोश हो गए। थोड़ा मलबा कमरे में मौजूद पत्नी पर भी गिरा। पत्नी ने किसी तरह से उनका हाथ पकड़कर मलबे से उन्हें निकाला। जैद ने बताया कि गनीमत रही कि समय रहते पत्नी ने उनकी जान बचा ली। हादसे में जैद के एक हाथ और पैर चोटें आई हैं, जबकि उनकी पत्नी मामूली रूप से चोटिल हुई। घटनास्थल पहुंची मेडिकल टीम ने दोनों का उपचार कर दिया।
ऊपर वाले की रहमत से सभी बच गए
हादसे के बाद पड़ोस के तौसिफ सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि घर में सभी लोग थे। धमाके होने के सभी लोग बाहर भागने लगे। तभी एक दीवार का थोड़ा हिस्सा भरभरा कर गिर पड़ा। दीवार में करीब ढाई फीट का सुराख हो गया। ऊपर वाले की रहमत से सभी की जान बच गई। वहीं, महमूद ने बताया कि हादसे के कारण उनके घर भी क्षतिग्रस्त हो गया। मगर कोई घायल नहीं हो सका।
या अल्लाह...मेरे मामा-मामी मुझे छोड़कर चले गए....
या अल्लाह...मेरे मामा-मामी मुझे छोड़कर चले गए....ये शब्द वेदना बन कर हादसे में मृत आलम की भांजी नूरजहां के गले से निकल रहे थे। आलम के पड़ोसी उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, मगर नूरजहां के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। नूरजहां ने बताया कि वह अपने ससुराल में रहती हैं। कुछ दिन पहले ही मामा से फोन पर बात हुई थी। मुझे क्या कि वह बात आखिरी होगी। बताया कि उन्हें जैसे ही हादसे की खबर मिली, वह खुद को रोक न सकीं। मौके पर पहुंचकर दहाड़े मारकर रोने लगीं। लोगों ने किसी तरह उन्हें संभाला।
सुबह 11.30 बजे : आलम के घर में लगी आग से हुआ विस्फोट।