लखनऊ। रुचिखंड स्थित लखनऊ पब्लिक कॉलेजिएट में शुक्रवार को राज्य स्तरीय प्रदर्शनी एवं प्रोजेक्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस दौरान छह मॉडलों को राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित किया गया है।
गाजियाबाद स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्र आदित्य राज चोपड़ा ने वर्ल्ड फर्स्ट साइलेंस नाॅन इलेक्ट्रिक नेब्युलाइजर मॉडल बनाया है। आदित्य के मॉडल को राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी के लिए चयनित किया गया। पहाड़ों पर ऑक्सीजन का स्तर कम है, जब फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाने की जरुरत हो तो वहां नेब्युलाइजर की मदद ली जा सकती है। आदित्य ने बताया कि मैनुअल नेब्युलाइजर की मदद से हवा का निरंतर प्रवाह होता है, जो एक बार में कम से कम 15 मिनट तक चल सकती है। इसके जरिए हम सांस लेने योग्य हवा बना सकेंगे। सिलिकॉन ब्लैडर का उपयोग कर मजबूत दबाव सहन करने वाले पॉलीकार्बोनेट का निर्माण स्वयं कर सकेंगे।
मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में छह अलग-अलग मॉडल को राष्ट्र स्तरीय प्रदर्शनी के लिए चयनित किया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 39 जिलों से 65 बाल वैज्ञानिकों ने अपने उत्कृष्ट नवाचारी माॅडलों का प्रदर्शन किया। इसमें सबसे अधिक 11 मॉडल्स लखनऊ से रहे। मुख्य अतिथि अपर शिक्षा निदेशक सुरेंद्र कुमार तिवारी ने सभी चयनित छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया।
इन छात्रों के मॉडलों का हुआ चयन
आगरा पब्लिक स्कूल के छात्र दिव्यांश जैन के मॉडल विद्यवता स्टूडेंट ऑनली डिवाइस फॉर हाई वर्किंग एसपिरेंट्स, बुलंदशहर बीके पब्लिक स्कूल की छात्रा वंदना शर्मा का मॉडल सेल्फ सस्टेनेबल इलेक्ट्रिसिटी फार्म एल्जे, द मन्थन स्कूल (गौतमबुद्ध नगर) के छात्र अनय के मॉडल फिक्स एंड ड्रॉप पैथहोल्स, दिल्ली पब्लिक स्कूल (गाजियाबाद) के छात्र आदित्य राज चोपड़ा का मॉडल वर्ल्ड फर्स्ट साइलेंस नान इलेक्ट्रिक नेबुलाइजर, रानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल स्कूल लखनऊ की छात्रा वैष्णवी तिवारी के मॉडल डेफ एंड डंब प्रोजेक्ट, सेंट मैरी स्कूल (मिर्जापुर) के छात्र अभिरूप वर्मा का मॉडल सेमी ऑटोमेटिक मूविंग सीड सोइंग मशीन शामिल है।
रफ कार्य के लिए डिजिटल बोर्ड का उपयोग
आगरा पब्लिक स्कूल के छात्र दिव्यांश जैन ने स्टूडेंट ऑनली डिवाइस फॉर हाई वर्किंग एसपिरेंट्स मॉडल बनाया है। यह एक तरह का डिजिटल बोर्ड है जो रफ कार्य के लिए किया जाता है। दिव्यांश के शिक्षक प्रदीप ने बताया कि गणित या किसी तरह के सवाल हल करते समय रफ काम ज्यादा होता है, उसके बचाव के लिए डिजिटल बोर्ड का उपयोग किया जा सकता है।
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डेफ एंड डंब प्रोजेक्ट से दिव्यांगों को मिलेगी मदद
लखनऊ स्थित रानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल स्कूल की छात्रा वैष्णवी तिवारी ने डेफ एंड डंब प्रोजेक्ट का मॉडल बनाया है। एक ही उपकरण के जरिए दृष्टिबाधित, श्रव्य और मौखिक रूप से दिव्यांगों के लिए मददगार साबित होगी। वैष्णवी ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य दिव्यांगों को देखकर, सुनकर और बात करने के लिए स्वतंत्र व आत्मविश्वासी महसूस करना है।