विधानसभा चुनाव में और चटख हुए भगवा रंग के सामने बाकी दलों के रंग फीके पड़ गए। बृहस्पतिवार को आए चुनाव नतीजों ने जहां सपा-रालोद, बसपा और कांग्रेस की होली बदरंग कर दी वहीं भाजपा खेमे को रंगों से सराबोर कर दिया। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने चुनावी मैदान फतह करके विपक्ष को तगड़ा झटका दिया है।
यूपी विधानसभा चुनाव में और चटख हुए भगवा रंग के सामने बाकी दलों के रंग फीके पड़ गए। बृहस्पतिवार को आए चुनाव नतीजों ने जहां सपा-रालोद, बसपा और कांग्रेस की होली बदरंग कर दी वहीं भाजपा खेमे को रंगों से सराबोर कर दिया। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने चुनावी मैदान फतह करके विपक्ष को तगड़ा झटका दिया है। खास तौर पर सत्ता की दौड़ में शामिल सपा-रालोद खेमा सदमे में है। प्रदेश के चुनावी महासमर के नतीजे आने के बाद कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल है।
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अपेक्षा से कहीं ज्यादा अच्छे नतीजे आने से जहां भाजपाइयों के चेहरों पर रौनक है तो सपा, कांग्रेस व बसपा के समर्थक बेहद मायूस हैं। नतीजों का असर सियासी पार्टियों के दफ्तरों पर भी नजर आ रहा है। भाजपा कार्यालय में उत्साही कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं तो सपा, रालोद, बसपा व कांग्रेस के दफ्तरों व नेताओं के घरों पर सन्नाटा पसरा है। चुनाव नतीजे सपा-रालोद गठबंधन के लिए बड़ा झटका साबित हुए हैं। हालांकि चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा के कई बड़े नेता इस बार विधानसभा की चौखट तक पहुंचने में कामयाब नहीं हो सके लेकिन कुल मिलाकर पार्टी की जबर्दस्त कामयाबी ने इस जख्म पर मरहम लगा दिया।
भाजपा के लिए होली से पहले ही रंगों की बरसात हो गई। भाजपा को न सिर्फ शानदार जीत हासिल हुई बल्कि लंबे समय के बाद लगातार दो बार सत्ता हासिल करने का रिकार्ड बनाने का मौका भी मिला। इसने होली का रंग और चटख कर दिया। जबर्दस्त बहुमत मिलने पर केसरिया रंग भाजपाइयों के सिर चढ़कर बोल रहा है। क्या नेता क्या कार्यकर्ता, जीत की खुशी में सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल से रंगने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। भाजपा दफ्तर में जमकर अबीर-गुलाल उड़ा तो उत्साही कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी करके फागुन में दिवाली भी मना डाली। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे।
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अखिलेश-जयंत का रंग पड़ा फीका
पीएम नरेंद्र मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ की जोड़ी के सामने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी का रंग फीका पड़ गया। कांग्रेस और मायावती के बाद जयंत को साथ लेकर चुनावी किला फतह करने का सपा का तीसरा प्रयोग भी सफल नहीं हो सका। वोटरों ने न सिर्फ सपा और उसके सहयोगियों नकार दिया बल्कि इनके सियासी प्रयोग की ऐसी हवा निकाली जिसकी टीस इन्हें लंबे वक्त तक सताती रहेगी। प्रदेश के मतदाताओं ने साफ कर दिया कि चुनावी फायदे के लिए बेमेल ‘साथ’ उसे पसंद नहीं आया।
मायावती व प्रियंका भी बेअसर
मोदी और योगी की भगवा आंधी ने बसपा प्रमुख मायावती व कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा गांधी का भी रंग उड़ा दिया। बसपा के नीले और कांग्रेस के तिरंगे भाजपा का चटख भगवा रंग चढ़ गया। इस बार के मायावती जिस तरह से चुनाव मैदान में नजर आ रही थीं उसे देखते हुए माना जा रहा था कि वह बहुत गंभीर नहीं है। इसी का नतीजा रहा कि बसपा सीटों के लिहाज से 2017 के आंकड़े के आसपास भी नहीं पहुंच सकी। बसपा को अपना वोट बैंक गंवाकर इसकी कीमत चुकानी पड़ी। चुनाव नतीजों से साफ है कि बसपा के दलित वोट बैंक में सेंध लगाने में भाजपा और सपा कामयाब रही। भाजपा के पाले में बड़ा हिस्सा गया। नतीजों से इतना तो साफ हो गया कि अब दलित उनके साथ पहले की तरह जुड़ा नहीं रह गया है। अलबत्ता प्रियंका गांधी पूरे चुनाव में सक्रिय तो रहीं लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी और एक के बाद एक कई बड़े नेताओं के पार्टी छोड़कर भाजपा में चले जाने की वजह से कांग्रेस पूरे चुनाव में मुकाबले से बाहर ही नजर आई। इक्का-दुक्का सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों ने अपने समीकरणों और दम के आधार पर जरूर अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन मोटे तौर पर देखा जाए तो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बहुत मजबूत उपस्थिति दर्ज नहीं करा सकी।