सर्पदंश के बाद गुजरता हर मिनट जानलेवा है। ऐसे में मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। कोबरा से अधिक घातक करैत सांप है। डसने के बाद मरीज में लकवा जैसे लक्षण दिखते हैं। सर्पदंश से हर साल 50 हजार तक लोगों की मौत होती है। दुनियाभर में सांपों की 3700 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 15 फीसदी प्रजातियों को खतरनाक माना जाता है।
बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ी हैं। अगर रात में सर्पदंश हुआ और लकवा जैसे लक्षण दिख रहे हैं तो झाड़फूंक में समय गंवाने के बजाय सीधे अस्पताल पहुंचें। यह करैत का दंश हो सकता है। इसका जहर धीरे-धीरे असर करता है। समय से उपचार नहीं मिलने पर मरीज की मौत हो सकती है।
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प्रदेश के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम ने सर्पदंश से जुड़े शोध पत्रों पर नए सिरे से अध्ययन किया। इसमें पता चला कि दूसरे सांपों के मुकाबले करैत की चपेट में आने वाले मरीजों का बचाना मुश्किल हो जाता है। करैत सांप (बंगारुस) रात के वक्त ही काटता है। इसके दांत छोटे और सीधे होते हैं, इसलिए निशान नहीं पड़ते हैं। सिर्फ दंश वाले स्थान पर लालिमा या झनझनाहट होती है। कुछ देर में लकवा जैसे लक्षण आते हैं।
...तो एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन भी नहीं करता असर
करैत दंश में देर से अस्पताल पहुंचने पर एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन का असर भी कम होता है। समय से उपचार नहीं मिलने पर विकलांगता आ सकती है या मौत हो सकती है।
हर 20-25 मामलों में एक या दो ही करैत दंश के...
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों की इमरजेंसी में हर दिन सर्पदंश के औसतन 20 से 25 मामले आते हैं। इनमें एक या दो केस ही करैत के निकलते हैं। अध्ययनों के मुताबिक, करैत सांप कोबरा से ज्यादा जहरीला होता है लेकिन इसका जहर धीमे-धीमे असर करता है।
अध्ययन करने वाली टीम
अध्ययन टीम में डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डॉ. राजीव रतन सिंह, फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रदीप कुमार यादव समेत कुल छह लोग शामिल रहे। इन्होंने सर्पदंश पर प्रकाशित करीब 1105 लेख ढूंढे और 18 विशिष्ट लेखों का अध्ययन किया, जिनमें 1014 मरीजों का ब्योरा था। अध्ययन को जर्नल ऑफ फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सीकोलॉजी में स्थान मिला है।
क्या आती है समस्या
डॉ. राजीव ने बताया कि करैत दंश के मामले में लक्षण के आधार पर दवाएं दी जाती हैं। ज्यादा असर वाले अंगों को बचाने की कोशिश शुरू होती है। कई बार वेंटीलेटर की भी जरूरत पड़ती है। डब्ल्यूएचओ का निर्देश है कि सर्पदंश के मामले में संबंधित स्थान पर पट्टी बांध देना चाहिए और तत्काल अस्पताल पहुंचना चाहिए।
इस तरह दिखते हैं लक्षण
करैत के जहर का असर होने पर बेहोशी छाने लगती है। ऐसा लगता है कि लकवा मार दिया है। पेट दर्द, पसीना, उल्टी, हृदयगति धीमी होना, उच्च रक्तचाप जैसे लक्षण हो सकते हैं जो अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते होते हैं। अगर उपचार में देरी हुई तो श्वसन मांसपेशियों पर असर पड़ता है और मौत तक हो जाती है।
यूपी में दो दर्जन प्रजातियां
प्रदेश में सांप की दो दर्जन से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें करैत सबसे ज्यादा विषैला है। इसके दांत छोटे होते हैं। आकार पतला होता है। रात में ही सक्रिय होता है। यह काला या गेहूंए रंग का होता है। इसके अलावा रसेल वाइपर, धामिन, रैट स्नेक, वुल्फ स्कैन और ब्रांजबैंक ट्री स्नेक भी पाए जाते हैं।
बारिश शुरू होते ही सभी अस्पतालों के अधीक्षकों व मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन का इंतजाम रखने का निर्देश दिया गया। बाढ़ प्रभावित और जलभराव वाले इलाकों में अतिरिक्त खुराक रखने को कहा गया।
चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि सभी मुख्य चिकित्साधिकारी और अधीक्षक इसकी निगरानी कर रहे हैं। वहां स्टॉक भेजने के निर्देश हैं, जहां बारिश के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवाएं व इंजेक्शन कम हैं। सर्पदंश के बारे में लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं।