लखनऊ। गजलों की मधुर सरगम और चंदन दास की मखमली आवाज ने शनिवार को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के कला मंडपम में ऐसी शाम सजाई कि संगीत प्रेमी सुरों में डूबे नजर आए। शांति सांस्कृतिक कला केंद्र और उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘शाम-ए-गजल’ में मुंबई से आए सुप्रसिद्ध गजल गायक चंदन दास ने अपनी प्रस्तुतियों से समा बांध दिया।
चंदन दास ने गजल गायकी की शुरुआत ‘इस तरह मोहब्बत की शुरुआत कीजिए, एक बार अकेले में मुलाकात कीजिए...’ से की। इसके बाद ‘तन्हाइयों में फरियाद तो कीजिए’ पेश कर उन्होंने माहौल को रूहानी बना दिया। उनकी बहुचर्चित गजल ‘न जी भर के देखा ना कुछ बात की, बड़ी आरजू थी मुलाकात की...’ पर कला मंडपम तालियों और दाद से गूंज उठा। संगीत अनुरागियों ने हर शेर पर दिल खोलकर वाहवाही की।
समारोह में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार व गायिका डॉ. शांत्वना तिवारी के स्वरबद्ध गजल-संग्रह ‘एहसास’ का लोकार्पण भी किया गया। मुख्य अतिथि चंदन दास ने कहा कि गजल केवल गायन की विधा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की सहज अभिव्यक्ति है।
मिथिलेश लखनवी के मार्गदर्शन में आयोजित गायन कार्यशाला के प्रतिभागियों ने भी प्रस्तुतियां दीं। संस्था के संरक्षक डॉ. प्रभु नारायण दुबे, अध्यक्ष रंजना पांडेय, सचिव कल्पना तिवारी, कोषाध्यक्ष धर्म नारायण दुबे, प्रख्यात गजल गायक उस्ताद गुलशन भारती मौजूद रहे।