यूरोपियन यूनियन बैंक के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को मेट्रो रूट का परीक्षण किया। बैंक इससे पहले एलएमआरसी के अधिकारियों से लंबी वार्ता भी इन लोगों ने की।
एलएमआरसी को उम्मीद है कि,न केवल आर्थिक मदद की तौर पर बल्कि विभिन्न ग्लोबल टेंडर में भी यूरोपियन बैंक की मदद चाहिए। एलएमआरसी के अधिकारियों को ये यात्रा बहुत ही सकारात्मक लग रही है बल्कि बैंक के अधिकारियों ने फिलहाल एलएमआरसी को ऋण देने को लेकर कोई भी फैसला नहीं किया है।
एलएमआरसी को ट्रांसपोर्ट नगर से मुंशीपुलिया के बीच मेट्रो रेल परियोजना के संचालन को लेकर 6800 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसमें से 20-20 फीसदी राज्य और केंद्र सरकार से मिलेगा। जबकि करीब 4200 करोड़ रुपये मदद विदेशी ऋण के जरिये मिलने की उम्मीद है।
मेट्रो को पैसे देने के लिए कई विदेशी बैंकों से चल रही है बात
इस संबंध में एलएमआरसी यूरोपियन यूनियन बैंक,फ्रांसीसी बैंक ईएफबी और जापानी बैंक जाइका के संपर्क में है। मगर अभी तक केंद्र सरकार के पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) की स्वीकृति न मिलने की वजह से कोई भी एजेंसी ऋण देने के लिए राजी नहीं हो सकी है।
यूरोपियन बैंक के अधिकारियों ने एलएमएआरसी के अधिकारियों से लंबी बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने परियोजना की वित्तीय क्षमता,उसके डीपीआर,अब तक प्रगति,सरकार के सहयोग जैसे अनेक मुद्दों पर बातचीत की।
जिसके बाद में मंगलवार को बैंक के प्रतिनिधियों ने मेट्रो के निर्माणाधीन और उसके आगे के रूट का निरीक्षण किया। एलएमआरसी के अधिकारियों ने बताया कि,उन्होंने अब तक अपना कोई भी मंतव्य स्पष्ट नहीं किया है। मगर उम्मीद है कि, बहुत जल्द ही ऋण को लेकर बहुत ही सकारात्मक फैसला बैंक करेगा।