लखनऊ। अमौसी एयरपोर्ट पर विमानों को दूरी व रास्ता बताने वाले वर्षों पुराने डॉप्लर वेरी हाइ फ्रीक्वेंसी ओमनी डायरेक्शनल रेंज (डीवीओआर) व हाई पावर डिस्टेंस मेजरिंग इक्विपमेंट (एचपीडीएमई) को बदला जाएगा। इससे विमानों का संचालन और बेहतर हो जाएगा।
इन दोनों प्रणालियों को लगाने के लिए सोमवार को नए भवन का शिलान्यास किया गया। तकरीबन चार महीने के अंदर नए भवन का निर्माण पूरा हो जाएगा। भवन बनने से पुराने सिस्टम की जगह नई जेनरेशन के उन्नत नेविगेशन उपकरण स्थापित किए जाएंगे।
विमानन सेवाओं से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि डीवीओआर विमान को सटीक दिशा के बारे में जानकारी देता है। इससे पायलट ग्राउंड स्टेशन से अपनी दिशा निर्धारित करते हैं। सिस्टम में एचपीडीएमई भी शामिल है, जो पायलट को ग्राउंड स्टेशन से विमान की दूरी बताता है। मौजूदा नेवीगेशन सिस्टम की फ्रीक्वेंसी 360 किमी तक है। नए सिस्टम से इतनी रेंज को कवर करने के साथ विमानों का ऑपरेशन भी पहले से अधिक तेज हो सकेगा।
दरअसल, अमौसी एयरपोर्ट पर वर्तमान में प्रतिदिन 120 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमानों का संचालन होता है। प्रतिवर्ष 17 प्रतिशत की दर से यात्री और 20 प्रतिशत विमान सेवाएं बढ़ रही हैं। नए टर्मिनल टी थ्री के विस्तार के बाद विमान सेवाओं व यात्रियों की संख्या और बढ़ेगी। अगले पांच वर्षों में लखनऊ एयरपोर्ट पर विमानों की संख्या डबल होने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत लखनऊ एयरपोर्ट के डीवीओआर और एचपीडीएमइ को बदलना जरूरी था।
इस बाबत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने नेवीगेशन सिस्टम को बदलने के लिए प्रस्ताव भेजा था, जिसकी स्वीकृति पर सिस्टम स्थापित करने के लिए नए भवन का भूमिपूजन लखनऊ एयरपोर्ट के सीएओ दर्शन सिंह ने किया। भूमिपूजन कार्यक्रम में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के संयुक्त महाप्रबंधक(सीएनएस), सीएनएस-प्रभारी एए अंसारी आदि उपस्थित रहे।
नए भवन का शिलान्यास करते सीएओ।