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Lucknow News: इंजीनियरों ने घपला कर 20 फर्मों को पहुंचाया फायदा

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नगर निगम।
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लखनऊ। नगर निगम में इंजीनियरों और अधिकारियों ने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए काम कम करके अधिक भुगतान लेने और काम में फर्जीवाड़ा कर करोडों का गोलमाल किया है। वित्तीय वर्ष 2015-16 की ऑडिट में जो मामले सामने आए, उनमें इंजीनियरों और ठेकेदारों के अलावा उन ठेकेदार फर्माें पर भी शिकंजा कस सकता है, जिनको इसका फायदा मिला है। मामले को लेकर विधानसभा की लेखा संपरीक्षा समिति गंभीर है।
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नगर निगम में 10 साल पहले जो घपले हुए थे, वह उस समय हुए ऑडिट में पकड़े गए थे। जिनको लेकर नगर निगम से सफाई भी मांगी गई थी, मगर निगम उसका कोई सही जवाब नहीं दे पाया। उसके बाद भी कई बार जवाब मांगा गया, मगर समाधान नहीं हुआ। इसके बाद अब ऑडिट में सामने आ चुके मामले विधानसभा की लेखा संपरीक्षा समिति में पहुंचे हैं, जहां से नगर विकास विभाग से जवाब मांगा गया है।
अब उसको लेकर नगर निगम से 10 साल पहले उठी उन सभी 41 ऑडिट आपत्तियों को लेकर जवाब मांगा गया है, जिनको नगर निगम प्रशासन अब तक दूर नहीं करा पाया है। अब शासन की सख्ती के बाद सबसे अधिक हड़कंप नगर निगम के अभियंत्रण और लेखा विभाग में है। समिति को रिपोर्ट भेजने के लिए निर्माण कार्यों की माप पुस्तिका ( एमबी) रिकार्ड रूम और बंद अलमारियों में ढूंढी जा रही हैं। कई मिली हैं तो कई नहीं मिल रही हैं।
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जांच के दायरे में आईं ये फर्में
रजिया कांस्ट्रक्शन, एसएस कांस्ट्रक्शन, यशी ट्रेडर्स, ईगल एसोसिएट, सिद्धी विनायक इंटर प्राइजेज, अराध्या इंटर प्राइजेज, रोहित कांस्ट्रक्शन, अन्नू इंटरप्राइजेज, यामीन बिल्डर्स, एसपी जायसवाल, आरएस बिल्डर्स, केपी इंटरप्राइजेज, नरायन प्रकाश मिश्रा, पिंक पैंथर इंटर प्राइजेज, आकाश इंटरप्राजेज, विक्रम कक्कड़, सिंह इंटरप्राइजेज, सुरेश कुमार।
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