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अच्छी खबर : कतर्निया घाट में बढ़ रहा दुर्लभ गिद्धों का कुनबा, कुछ साल पहले लुप्त हो गए थे

Wed, 06 Mar 2019 09:13 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला बहराइच
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गिद्ध - फोटो : amar ujala
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संरक्षित वन क्षेत्र कतर्निया घाट में दुर्लभ गिद्धों का कुनबा बढ़ रहा है। हाल ही में वन विभाग की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में 128 गिद्धों के मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इसे सेंचुरी क्षेत्र के वन्य जीव विशेषज्ञ पर्यावरण के लिए सुखद संकेत मान रहे हैं। 
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पर्यावरण के स्वच्छकार कहे जाने वाले दुर्लभ गिद्ध आधे दशक पूर्व तराई से लुप्त प्राय हो गए थे। इससे वन्य जीव विशेषज्ञ पर्यावरण संतुलन को लेकर चिंतित हो उठे थे। लंबी बहस भी छिड़ी थी। लेकिन इस बहस के बीच ही वर्ष 2009-10 में हिमालय की तलहटी में बसे बहराइच के कतर्निया घाट संरक्षित वन क्षेत्र में अचानक गिद्धों की मौजूदगी दिखी थी। 

कतर्निया घाट वन्य जीव प्रभाग के उपखंड अधिकारी जसवंत सिंह ने बताया कि बताया कि महकमे का प्रयास रंग लाया। इस समय संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्निया घाट, निशानगाड़ा, सुजौली व ककरहा रेंज में गिद्धों के लगभग तीस घोसले हैं। उन्होंने बताया कि वैसे तो विश्व में गिद्धों की 600 प्रजातियां पाई जाती हैं। लेकिन भारत में सिर्फ 19 प्रजातियां हैं।
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इनमें से दो प्रजातियां संरक्षित वन क्षेत्र कतर्नियाघाट वन्य जीव में विहार करती हैं। उपखंड अधिकारी ने कहा कि हाल ही के सर्वेक्षण में गिद्धों का कुनबा बढ़ने की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पहले गिद्धों की संख्या 100 के आसपास थी।  
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रेंज वार गिद्धों की मौजूदगी 

  • कतर्निया घाट     72
  • निशानगाड़ा        10
  • सुजौली              30
  • ककरहा            10
  • मोतीपुर             06

धर्मापुर और मुर्तिहा में नहीं हैं गिद्ध
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के धर्मापुर और मुर्तिहा रेंज में अब तक एक भी गिद्धों की मौजूदगी के प्रमाण नहीं मिले हैं। 

संरक्षित क्षेत्र में पाई जाती हैं यह प्रजातियां
डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि संरक्षित वन क्षेत्र में किंग वल्चर और हिमालयन प्रजाति के गिद्ध की प्रजातियां पाई जाती हैं। 

यहां मौजूद हैं घोसले
कतर्निया घाट संरक्षित वन क्षेत्र के कुड़कुड़ी कुआं, गेरुआ नदी, कैलाशपुरी, मैला नाला, घड़ियाल प्रजनन केंद्र के टावर व ककरहा रेंज कार्यालय के निकट गिद्धों के घोसले मौजूद हैं।
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