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17 बीघा जमीन तालाब के खाते में दर्ज करने का आदेश

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अयोध्या। तालाब, पोखरा व नाला जल संरक्षण के लिए प्रकृति का अनुपम उपहार हैं। समाज के कतिपय भू लोलुप लोग इन संपदाओं को समाप्त करके स्वयं अपने व संपूर्ण समाज के लिए विनाशकारी स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं।
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कतिपय सरकारी सेवक भी इसमें संलिप्त हो जाते हैं जिससे स्थिति और विस्फोटक हो रही है। ऐसे व्यक्तियों को चिह्नित करके उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
इस टिप्पणी के साथ उपसंचालक चकबंदी तरुण कुमार मिश्र ने 17 बीघा तालाब की जमीन को फिर से तालाब के खाते में दर्ज करने का आदेश उपजिलाधिकारी बीकापुर को दिया है। कोर्ट ने इस जमीन से कब्जा भी तत्काल हटाने का आदेश दिया है। अवैध कब्जेदार इस पर 56 साल से अतिक्रमण किए हुए थे।
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मामला बीकापुर तहसील के असरेवा गांव का है। यहां की रहने वाली जितना देवी व रामअवतार आदि ने संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायती प्रार्थना पत्र दिया था।
इसमें आरोप था कि गांव के गाटा संख्या 1205 रकबा 17 बीघा तालाब के खाते की भूमि है मगर इस पर गांव के भगवान बख्श, लक्ष्मण, रामसूरत का नाम गलत रूप से अंकित है।
उक्त भूमि को पूर्ववत तालाब के खाते में अंकित किया जाए। शिकायत पर जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से मामले को निस्तारण के लिए डीडीसी को सौंपा था।
इस पर बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी द्वारा 15 फरवरी को आख्या प्रस्तुत की गई थी कि 1360 फसली के खाता संख्या 518 में ये जमीन तालाब के खाते में अंकित है।
जिसमें चकबंदी अधिकारी के आदेश के आधार पर 15 अक्तूबर 1962 को इस जमीन पर भगवान बख्स, लक्ष्मण व रामसूरत का नाम वर्ग चार के रूप में दर्ज करने का आदेश हुआ।
दूसरी चकबंदी में भी ये जमीन इन्हीं लोगों के नाम दर्ज चली आई। शिकायत के बाद दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया गया। जिसमें लल्लन सिंह की ओर से कहा गया कि विवादित भूमि उसे पट्टे से प्राप्त है और उसे जमींदार ने 12 मार्च 1967 को पट्टा दिया था। इसी आधार पर उसका नाम अंकित चला आ रहा है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विवादित जमीन को फिर से तालाब के खाते में दर्ज करने का आदेश उपजिलाधिकारी बीकापुर को दिया है। जमीन से कब्जा हटवाने का आदेश भी एसडीएम बीकापुर को दिया गया है। चकबंदी अधिकारी द्वारा 15 अक्तूबर 1962 को पारित आदेश भी डीडीसी ने निरस्त कर दिया है।
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