बिजली व्यवस्था के निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर मंगलवार को बिजली कर्मियों ने एक दिवसीय कार्य बहिष्कार किया। पूरे प्रदेश में इंजीनियरों एवं कर्मियों ने कामकाज ठप करके जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया।
लखनऊ में करीब 5000 इंजीनियर और कर्मचारी सड़क पर उतरे और शक्ति भवन का घेराव कर नारेबाजी की। इसके बाद संगठनों ने सभा करके सरकार के इस फैसले के विरोध में नौ अप्रैल से तीन दिवसीय हड़ताल का एलान किया है। वहीं, मंगलवार को हड़ताल के चलते उपभोक्ता काम कराने के लिए भटकते रहे।
सभी जिलों में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उप्र. पावर ऑफीसर्स एसोसिएशन, विद्युत कार्यालय सहायक संघ, विद्युत तकनीकी कर्मचारी एकता संघ, आशुलेखक संघ, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ, यूपी पावर कर्मचारी संघ के संयुक्त तत्वावधान में इंजीनियर, कर्मचारियों ने निजीकरण के फैसले को निरस्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
लखनऊ में शक्ति भवन में हुई सभा में वक्ताओं ने 9, 10 एवं 11 अप्रैल को तीन दिवसीय हड़ताल का एलान किया। इस दौरान इंजीनियर एवं कर्मचारी कार्यालय तो आएंगे पर काम नहीं करेंगे। वे तीनों दिन शक्ति भवन पर डेरा डालकर सत्याग्रह करेंगे। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सभा को कर्मचारी नेता इं. शैलेंद्र दुबे, राजीव सिंह, केबी राम, अवधेश कुमार वर्मा, अनिल कुमार, आरपी केन, सदरुद्दीन राना, राकेश त्रिवेदी, जीबी पटेल, कप्तान सिंह, राजेंद्र विक्रम व रामपाल मिश्रा ने संबोधित किया। प्रदर्शन में एसबी सिंह, सौरभ मौर्य, अंकित वर्मा, राम इकबाल और संजीव वर्मा समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए।