लखनऊ। मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन विद्यार्थियों को बहुभाषी बनाने पर जोर दिया गया। भाषा और साहित्य में नए ट्रेंड अपनाने के साथ परंपरा बनाए रखने की जरूरत बताई। कहा गया कि विदेशी भाषाओं के उच्चारण में हमें किसी की नकल करने की नहीं, बल्कि अपने लहजे से पहचाने जाने की जरूरत है।
नदवा रोड स्थित सैटेलाइट परिसर में हुए सम्मेलन में इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी के निदेशक रजनीश अरोड़ा ने भाषा और साहित्य में डिजिटल ट्रांसफार्मेशन के बेहतर इस्तेमाल की हिमायत की। कहा कि विद्यार्थियों को कम से कम मातृभाषा, स्थानीय भाषा और अंतरराष्ट्रीय भाषा पर पकड़ होनी चाहिए।
लविवि की प्रो. निशी पांडे ने कहा, तकनीक और सोशल मीडिया ने भाषा व साहित्य को ग्लोबल बना दिया है। बदलाव की वजह से भाषा में इमोजी व शॉर्टकट का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ग्लोबल ट्रेंड को अपनाने के साथ अपनी भाषा और साहित्य की हिफाजत भी हमारी जिम्मेदारी है।
मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विवि हैदराबाद की ओएसडी प्रो. शगुफ्ता शाहीन ने कहा, शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि भाषा और साहित्य में हो रहे बदलाव से विद्यार्थियों को परिचित कराएं। सेमिनार का संचालन डॉ. नुजहत अख्तर, डॉ. शाह मोहम्मद फाएज ने किया। इस दौरान 14 स्कॉलर ने अपने लेख प्रस्तुत किए।