सरकार का कहना है कि सीमित वित्तीय संसाधनों के बावजूद बिजली निगमों में अधिकारियों-कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ दिया गया है।
इसके अलावा कई इन्सेटिव स्कीम भी लागू की गई है। जिन शहरों में फ्रेंचाइजी व्यवस्था प्रस्तावित है वहां कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों को फ्रेंचाइजी की सहमति से प्रतिनियुक्ति पर कार्य करने का विकल्प मौजूद रहेगा।
ऐसा विकल्प चुनने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन-भत्ते किसी भी दशा में कम नहीं किए जा सकेंगे। जो स्टॉफ फ्रेंचाइजी के साथ काम करने का इच्छुक नहीं है उन्हें वर्तमान सेवा शर्तों पर प्रदेश के अन्य विद्युत खंडों में तैनात किया जाएगा। प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या तेजी बढ़ना अवश्यंभावी है जिसके लिए स्टॉफ की जरूरत बनी रहेगी।
आगरा की बिजली व्यवस्था 1 अप्रैल 2010 को फ्रेंचाइजी टोरेंट पावर को सौंपी गई थी। इसके लिए टोरेंट पावर के साथ पावर कार्पोरेशन ने 19 मई 2009 को एग्रीमेंट किया था। एग्रीमेंट के बाद बिजली अभियंताओं व कर्मचारियों ने निजीकरण के खिलाफ आंदोलन भी शुरू किया था जिसके चलते हस्तांतरण की कार्यवाही करीब एक साल तक लटकी रही। अखिरकार 1 अप्रैल 2010 को बिजलीकर्मियों के भारी विरोध के बावजूद आगरा की बिजली व्यवस्था टोरेंट के हवाले कर दी गई।