उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने टैरिफ विनियमन में किए गए बदलाव को काला कानून बताते हुए कहा कि इसके विरोध में निरंतर संघर्ष किया जाएगा। प्रदेश के उपभोक्ताओं का विद्युत निगमों पर करीब 33122 करोड़ बकाया ( सरप्लस) निकल रहा है। ऐसे में ईंधन अधिभार शुल्क में बढोतरी नहीं होनी चाहिए। लेकिन पावर कार्पोरेशन ने गुपचुप तरीके से बदलाव कर दिया है। पांच साल बाद पहली बार बिजली की दरें बढ़ाई गई हैं। अब हर माह अतिरिक्त बिजली शुल्क वसूलने की कोशिश होगी, जिसका विरोध किया जाएगा। पहले उपभोक्ताओं का बकाया लौटाया जाए। इसके बाद ही बिजली दरों में बढोतरी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निजीकरण की शुरुआत नहीं हो पाई है। फिर भी निजी घरानों के दवाब में हर महीने ईंधन अधिभार शुल्क के रूप में बिजली दरों में बढ़ोतरी कर दी गई है। यह विद्युत नियामक आयोग के काले कानून की वजह से ही हो पाया है। उन्होंने कहा कि जनवरी माह का 78.99 करोड़ रुपया उपभोक्ताओं पर निकल रहा है तो उसे पहले से उपभोक्ताओं का बकाया चल रहे 33122 करोड़ रुपये से ही वसूला जाना चाहिए। परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री से हस्तपेक्ष करने की मांहग करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं पर किसी भी कीमत पर अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जाना चाहिए। अन्थया इससे प्रदेश सरकार की छवि भी धूमिल होगी।