पुलिस के मुताबिक अजय ने अप्रैल 2024 में रुपयों का गबन किया था। इस मामले में बिजली विभाग के कार्यकारी इंजीनियर भविष्य कुमार सक्सेना ने अलीगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि 18 अप्रैल 2024 से आरोपी ने बिना किसी सूचना के दफ्तर आना बंद कर दिया था। आरोपी ने एक अप्रैल 2024 से 18 अप्रैल 2024 तक कैश काउंटर से कुल 97 लाख 24 हजार 464 रुपये लिए थे। इसमें से उसने सिर्फ 44 लाख 69 हजार 42 रुपये ही जमा किए थे। छानबीन में पता चला कि आरोपी 52 लाख 55 हजार 422 रुपये लेकर भाग गया है। विभाग ने अजय से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया पर उसने फोन बंद कर दिया था। पुलिस ने आरोपी के सी ब्लॉक इंदिरानगर स्थित घर पर दबिश दी, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल सका। इसके बाद टीम का गठन किया गया। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने अजय को पुरनिया चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया।
अमर उजाला ने खोली थी फर्जीवाड़े की पोल
महानगर खंड के कार्यकारी सहायक अजय वर्मा द्वारा बिजली बिलों की रकम को बैंक में जमा करने की आड़ में किए गए फर्जीवाड़े की पोल अमर उजाला ने 25 अप्रैल 2024 को बिजली बिल के 65 लाख लेकर कर्मचारी चंपत, निलंबित शीर्षक से खबर को छाप कर खोली थी। दरअसल, अजय वर्मा को कई उच्च स्तर के अफसरों का संरक्षण हासिल होने के कारण प्रकरण को दबा दिया गया था। अफसरों के दबाव में गबन की रकम को अजय से किश्त में जमा करने का वादा लेकर उसे छोड़ दिया गया। अमर उजाला ने इस प्रकरण की पड़ताल शुरू की, तो आनन-फानन अजय वर्मा को निलंबित किया गया था।