रायबरेली। जिले में बिजली की खपत धीरे-धीरे बढ़ रही है। हाल यह है कि ग्रामीण अंचलों में फीडर अभी से 20 फीसदी अधिक एंपियर लोड पर चल रहे हैं। शहर के पुराने क्षेत्रों में बिजली की कटौती भी शुरू हो गई है। गर्मी बढ़ने के साथ एसी, कूलर चलना शुरू हो गए हैं, जिससे लोड बढ़ना शुरू हो गया है। यही हाल रहा तो मई और जून में बिजली का संकट खड़ा होना तय है।
जिले में फरवरी तक 87 से 90 मिलियन यूनिट की बिजली की खपत हो रही थी तो वहीं मार्च में यह बढ़कर 110 मिलियन तक हो गई और अप्रैल में यह 125 मिलियन यूनिट हो गई है। जिले के पुराने आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष मई-जून में बिजली की खपत 300 से 320 मिलियन यूनिट तक थी। जिस कारण बिजली के लिए लखनऊ पावर कार्पोरेशन की मदद लेनी पड़ी थी।
जिस तरह ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने गाइडलाइन जारी की है वह जिले के बिजली के अधिकारियों का पसीना छुड़ाने के लिए काफी है। शासन स्तर से साफ निर्देश है कि लाइनलॉस को रोका जाए तथा बिजली के बकाया बिल की वसूली भी 80 फीसदी हो। इसके बाद अधिक खपत पर बिजली की मांग को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
जिले का हाल यह है कि कई उपकेंद्रों पर लाइनलॉस 35 फीसदी है। कुछ जगहों पर तो जमकर चोरी हो रही है। छापा मारा जा रहा है लेकिन उसके बाद भी कटिया वाले अपना हिसाब बनाए हुए हैं। इसका खामियाजा फाल्ट और ट्रांसफार्मर फुंकने से आम लोगों को भुगतना पड़ता है।
उपकेंद्र पर फीडर की खपत बढ़ी
गर्मी बढ़ने के साथ घर-घर पंखा, कूलर व एसी चले रहे हैं। इसका नतीजा है कि उपकेंद्रों पर फीडर की खपत 180 एंपियर तक पहुंच गई है। जबकि समान्य तौर पर यह 120 से 140 एंपियर तक होनी चाहिए। जब अभी यह हाल है तो मई जून में कितने एंपियर लोड बढ़ेगा यह कहना मुश्किल है।