लखनऊ। रोडवेज के अधिकारियों का नया कारनामा सामने आया है। इन अफसरों ने राजधानी में दो हफ्ते तक इलेक्ट्रिक सिटी बसें बगैर परिचालकों के दौड़ा दीं। इनमें तैनात किए गए प्राइवेट एजेंसी के कर्मचारियों ने टिकट के नाम पर अवैध वसूली की। मैनुअल तरीके से टिकट काटने के साथ यात्रियों से ज्यादा किराया वसूलकर कम कीमत का टिकट दिया। इससे सिटी ट्रांसपोर्ट का राजस्व तो नहीं बढ़ा, पर अधिकारियों की जेबें जरूर भर गईं। सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए काम करने वाली कंपनी पीएमआई ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नगर विकास मंत्री एके शर्मा से मामले की शिकायत करने के साथ जांच की मांग की है।
शिकायत में बताया गया कि 29 मई को 170 कंडक्टरों की हड़ताल का फायदा अधिकारियों ने उठाया। उन्होंने दैनिक यात्रियों को इलेक्ट्रिक सिटी बसों की सेवाएं देने के बहाने तीन प्रमुख रूटों कमता से स्कूटर इंडिया वाया शहीद पथ, दुबग्गा से विराजखंड वाया पत्रकारपुरम और दुबग्गा से मोहनलालगंज वाया तेलीबाग पर 70 से अधिक बसें बिना परिचालकों के चलवा दीं।
कानपुर, मेरठ से बुलाए कर्मचारी
शिकायत में बताया गया कि लखनऊ में कंडक्टरों की हड़ताल के दौरान रोडवेज के अफसरों ने कानपुर और मेरठ से एसएस कंपनी के कर्मचारी बुला लिए। इन्होंने मैनुअल तरीके से टिकट काटने के साथ अवैध वसूली की। यात्रियों से 30 रुपये वसूले, लेकिन उन्हें 10 रुपये का मैनुअली टिकट दिया। सूत्रों के अनुसार, टिकट तो बने, पर उनकी पूरी आय सिटी ट्रांसपोर्ट के राजस्व में नहीं जुड़ी। इससे प्रति बस 15 हजार रुपये तक होने वाली आय घटकर चार हजार रुपये तक पहुंच गई। उधर, सिटी ट्रांसपोर्ट प्रशासन का कहना है कि बसों को बिना कंडक्टर के चलवाया गया था, लेकिन रास्ते में टिकट बनाने के लिए टीआई और निजी कंपनी के कर्मियों को तैनात किया गया था।
बड़ी संख्या में कंडक्टर हड़ताल पर चले गए थे। यात्रियों की सुविधा के लिए बिना परिचालकों के बसें चलवाई गईं। बीच रास्ते में टीआई टिकट काटते रहे। वसूली की शिकायत पर जांच कराई जाएगी।
- विमल राजन, एमडी, सिटी ट्रांसपोर्ट