परिवारवालों ने इतना समय नहीं होने की बात कहते हुए डॉक्टरों से मिन्नतें कीं। अबरार के बेटे सैफ के मुताबिक पिता भी हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं पसीजे। मायूस होकर हम पिता को लेकर लोहिया संस्थान गए। रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
गिड़गिड़ाने पर डॉक्टर बोले ज्यादा शोर कर रहे हो, इसलिए नहीं देखेंगे
सैफ के मुताबिक इमरजेंसी में उनके पिता को तीन-चार इंजेक्शन लगाए गए। इसके बाद उनकी नाक और मुंह से खून आने लगा। पिता के गिड़गिड़ाने पर डॉक्टर बोले ज्यादा शोर कर रहे हो, इसलिए नहीं देखेंगे। मरीज की मौत के बाद वजीरगंज थाने में कार्रवाई के लिए तहरीर भी दी गई है।
केजीएमयू की सफाई-इलाज किया और उपलब्ध कराई एंबुलेंस
केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. सुधीर सिंह के मुताबिक अबरार अहमद को दिल की गंभीर बीमारी थी। वर्ष 2018 में कोरोनरी आर्टरी डिजीज की पुष्टि होने के बाद उनकी एंजियोप्लास्टी की गई थी। एंजियोप्लास्टी के बाद डॉक्टर ने समय-समय पर उन्हें जांच के लिए बुलाया था, लेकिन वे फॉलोअप के लिए ओपीडी में नहीं आए।
रविवार देर रात तबीयत बिगड़ने पर मरीज को हार्ट फेल्योर की गंभीर अवस्था में इमरजेंसी में लाया गया। जहां डॉक्टरों ने तुरंत भर्ती कर ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। जरूरी जांचें कराई गईं। हालत गंभीर होने की वजह से डॉक्टरों ने वेंटिलेटर की जरूरत बताई।
लोहिया संस्थान के लिए रेफर किया गया
लारी कार्डियोलॉजी के सभी आईसीयू-वेंटिलेटर बेड फुल थे। इसलिए उन्हें पीजीआई और लोहिया संस्थान के लिए रेफर किया गया। मरीज को ले जाने के लिए संस्थान ने एंबुलेंस भी उपलब्ध कराई, लेकिन दुर्भाग्य से उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।