रायबरेली। मौसम की बेरुखी और सिंचाई विभाग की मनमानी से किसान अब तक धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं। नहरों में पानी नहीं आया है। वहीं किसानों को सिंचाई की सुविधा के लिए लघुडाल खंड लखनऊ की ओर से सई नदी में लगे आठ पंप भी किसानों का मुंह चिढ़ा रहे हैं। विभागीय अभियंता कभी सई नदी में पानी की कमी तो कभी लोवोल्टेज की समस्या बताकर पंप बंद किए रहते हैं। खास बात यह है कि जिले में इस खंड का कोई अभियंता नहीं रहता है। किसानों के भरोसे इनको चलवाया जा रहा है।
जिले में पस्तौर, सोहलिया, चौहनिया, दरीबा, रघुनाथपुर, अकबरपुर, फागूपुर, जिजौलिया गांव के पास से निकली सई नदी में पंप लगाए हैं। यह पंप नदी का पानी उठाकर छोटी नहरों के जरिए किसानों के खेतों तक पहुंचाते हैं, लेकिन इनकी देखरेख के लिए भले ही अभियंताओं व कर्मचारियों की तैनाती हैं, लेकिन अभियंता लखनऊ में रहते हैं। प्रत्येक पंप में पानी क्षमता पांच क्यूसेक है। इन सभी से सिंचाई रकबा 1500 बीघे से ज्यादा। जब कभी कभार पानी चलाया भी जाता है, तो पूरे क्षेत्र में पानी नहीं पहुंचता है। क्योंकि कहीं पर पाइप ध्वस्त है, तो कहीं पर बनाई गई नहर टूटी है। सबसे खराब हालात रघुनाथ में बनाए गए पंप कैनाल की है। जगह-जगह नाली टूटी है। इससे किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है।
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कई बार किया प्रदर्शन नहीं हुई सुनवाई
भाकियू के पदाधिकारियों ने कई बार पंप चलवाए जाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया। जिलाधिकारी समेत अन्य अफसरों को ज्ञापन सौंपा, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। किसान रामउजेर, बंशीलाल, माताबदल, रामकृष्ण, शिवनाथ ने बताया कि पंप बीरान पड़े हैं। सींचपाल कभी कभार आते हैं। अन्य अधिकारी तो कभी देखने तक नहीं आते। इन पंपों की मेंटीनेंस के लिए हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन किसानों को इनसे कोई राहत नहीं मिल पाती है।