लखनऊ। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना में गड़बड़ी की आशंका में राजधानी के आठ निजी अस्पतालों के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है। आरोप है कि इन अस्पतालों में आईसीयू बेड के मुकाबले काफी ज्यादा संख्या में मरीज भर्ती दिखाए गए। इसके बाद स्टेट हेल्थ एजेंसी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (सांचीज) के पत्र के बाद सीएमओ ने जांच समिति बनाई है।
सांचीज की मुख्य कार्यपालन अधिकारी की ओर से इस मामले में जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया था। पत्र में कहा गया कि जिस तरह से इन निजी अस्पतालों में मरीज आईसीयू में भर्ती किए गए, वैसा किसी संक्रमण या महामारी में होता है। सामान्य अवस्था में हर मरीज आईसीयू में भर्ती नहीं रहता। जिलाधिकारी की ओर से सीएमओ को यह पत्र भेजा गया। इसके बाद सीएमओ ने अस्पतालों के खिलाफ जांच के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है।
9,900 रुपये प्रतिदिन है आईसीयू बेड का खर्च
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत बिना वेंटिलेटर बेड आईसीयू के लिए 9,350 रुपये और वेंटिलेटर के साथ 9,900 रुपये शुल्क तय है। सामान्य बेड के मुकाबले यह राशि ज्यादा होने से निजी अस्पताल इसमें खेल करने का प्रयास करते हैं। आयुष्मान योजना वाले निजी अस्पताल खर्च के बाद अपना बिल सांचीज को भेजते हैं। इन मामलों में आईसीयू बेड के मरीजों की संख्या ज्यादा देखकर सांचीज को शक हुआ और वहां से जिलाधिकारी को पत्र भेजकर जांच करने के लिए कहा गया।