लखनऊ। अमेरिकी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट कर करीब 100 करोड़ रुपये की उगाही करने वाले साइबर जालसाजों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज करेगी। ईडी ने लखनऊ पुलिस से केस से जुड़ी जानकारियां मांगी हैं। इसके बाद केस दर्ज कर जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ की जाएगी। जांच के दायरे में वे पुलिसकर्मी भी आएंगे जिन्होंने कुछ आरोपियों को घूस लेकर छोड़ दिया था।
बता दें कि लखनऊ पुलिस ने बीते जुलाई माह में गोमतीनगर स्थित समिट बिल्डिंग में एक गिरोह का पर्दाफाश किया था जो अमेरिकी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट करता था। पुलिस ने मौके से करीब 119 लोगों को हिरासत में लिया था जिनमें ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम शामिल थे। कोलकाता पुलिस की मदद से मास्टरमाइंड विनीत धर्मेंद्र वशिष्ठ, उसके साथी नायकर जयराज उर्फ चार्ल्स और महिला मित्र रिंकी दास गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। छानबीन में पता चला था कि विनीत को भारत में कॉल सेंटर चलाने का जिम्मा यूएस में बैठे गिरोह के सरगना ने दिया था। जांच में पता चला कि इस गिरोह के सदस्य ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों को भी ठग रहे थे।