पहले से ही कागजी फर्में बना कर उनके फर्जी खाते खोल लिए गए थे और इन्हीं को काम दिया गया। ईडी ने अपनी पड़ताल में ऐसी फर्मों के खातों से रुपयों के लेन-देन के साक्ष्य हासिल कर लिए हैं।
ईडी अब यह पड़ताल कर रही है कि कितनी रकम को किस तरह से किस-किस खाते में पहुंचाया गया। इसके लिए कई बैंकों की शाखाओं के अधिकारियों से भी जानकारी मांगी गई है।
सूत्रों के अनुसार इन फर्मों के बारे में ईडी आयकर विभाग से जानकारी मांग रही है। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि पूरी जांच में कई बिंदुओं पर काम हो रहा है।
पहला तो यह कि किस-किस ने कितना हड़पा और कौन-कौन सी संपत्ति बनाई। दूसरा यह कि कितनी रकम की मनी लांड्रिंग की गई और तीसरा यह कि इसमें कौन-कौन शामिल था।
60 करोड़ जब्त किए
इसके पहले ईडी ने कुशवाहा पर बड़ी कार्रवाई करते हुए बाबूसिंह कुशवाहा समेत अन्य की 60 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है।
ईडी ने मनी लांड्रिंग कानून के तहत यह कार्रवाई की है। यूपी में भ्रष्टाचार के मामले में किसी राजनेता की संपत्ति जब्त किए जाने का संभवत: यह पहला मामला है।
इस बहुचर्चित घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। सुनवाई गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट में चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक जब्त की गई संपत्तियां लखनऊ, बांदा, नोएडा और दिल्ली में हैं।
मायावती के थे बेहद करीबी
एक दौर में मायावती के बेहद विश्वस्त लोगों में शुमार और बसपा सरकार में परिवार कल्याण व सहकारिता मंत्री रहे कुशवाहा और उनके सहयोगी पूर्व विधायक रामप्रसाद जायसवाल दो साल से गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं।
घोटाले के चलते ही उन्हें मंत्री पद गंवाना पड़ा था। यही नहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें पार्टी से भी बाहर कर दिया था।
इसी बीच, प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ स्थित जोनल ऑफिस ने कार्रवाई करते हुए कुशवाहा और सह आरोपी आरपी जायसवाल के कई फ्लैट और जमीनें जब्त कर लीं।
पीएमएलए में कर सकते हैं अपील
ईडी जल्द ही इन संपत्तियों को लेकर निषेधाज्ञा जारी करेगा। हालांकि आरोपियों के पास कार्रवाई के खिलाफ अपील करने का अधिकार है।
वह 180 दिनों के भीतर प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) में अपील कर सकते हैं।
यूपी के बड़े घोटालों में शुमार एनएचआरएम घोटाला करीब 5700 करोड़ रुपये का है।
बसपा राज में यह घोटाला खासा सुर्खियों में रहा था। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच की कमान संभाली थी।