देश की आर्थिक तरक्की के आइने में भी अपना प्रदेश काफी पीछे खड़ा है।
2009 और 2011 के बीच किए गए आर्थिक आकलन के मुताबिक देश के 35 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में से सूबे को 24वां स्थान मिला है। राष्ट्रीय प्रगति भी संतोषजनक नहीं मानी गई है।
हालांकि ,प्रदेश के लखनऊ, कानपुर देहात और मेरठ समेत नौ जिले ऐसे उभरे हैं जिन्होंने राष्ट्रीय मानक से अधिक स्कोर हासिल कर आर्थिक प्रगति की मिसाल पेश की है।
राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक प्रगति का आकलन करने वाली एजेंसी ‘क्रिसिल’ ने प्रति लाख लोगों के बीच बैंक की शाखाओं, ऋण लेने वालों व जमा खातों की संख्या के आधार पर आर्थिक तरक्की का आकलन किया है।
जिलास्तर पर तैयार इस रिपोर्ट के अनुसार गौतमबुद्धनगर ने आर्थिक रूप से तेज तरक्की करते हुए 100 में से 62.4 इन्क्लूसिव स्कोर के साथ प्रदेश में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है।
आम धारणा के विपरीत ललितपुर, जालौन, बांदा व झांसी ने अच्छा काम करते हुए अपने स्कोर में सुधार किया है।2009-11 के बीच किए गए आकलन में राष्ट्रीय स्तर पर जहां 4.7 स्कोर की बढ़ोतरी हुई है वहीं प्रदेश 3.9 तक सीमित रहा है।
वर्ष 2009 में राष्ट्रीय स्कोर 35.4 था जो 2011 में 40.1 रहा। एजेंसी ने राष्ट्रीय स्तर की इस प्रगति को भी ठीक नहीं माना है। यूपी का इन्क्लूसिव स्कोर 100 में से मात्र 33.5 रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर पुडुचेरी, चंडीगढ़ व केरल श्रेष्ठ तीन राज्य के रूप में उभरे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ तीन जिले जो चयनित हुए हैं उनमें पथानामथित्ता (केरल), कराईकल (पुडुचेरी) व तिरुवनंतपुरम (केरल) हैं।
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