विकास योजनाओं को लेकर भले ही अखिलेश सरकार गंभीर दिखने की कोशिश कर रही हो, पर शुरुआती दो साल में प्रदेश की तरक्की के ताजा आंकड़े इसकी गवाही नहीं दे रहे। वर्ष 20013-14 के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) महज पांच फीसदी रहने का अनुमान है।
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यह बात तब और गंभीर मानी जा सकती है कि जबकि 2012-13 में यह आंकड़ा 5.8 फीसदी के स्तर पर था। मार्च 2012 में ही अखिलेश यादव ने प्रदेश की सत्ता संभाली थी। अपने कार्यकाल के पहले साल की विकास दर को वे दूसरे साल में कायम नहीं रख सके।
राज्य नियोजन संस्थान के अर्थ एवं संख्या प्रभाग की ओर से गत 31 दिसंबर को जारी आंकड़ों में एक और दिलचस्प पहलू यह सामने आया है कि मुख्यमंत्री अपने पिता मुलायम सिंह यादव की सरकार के दौरान 2006-07 में विकास दर के 8.1 फीसदी के स्तर से काफी पीछे हैं।
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मायावती के कार्यकाल में भी इस आंकड़े को छुआ नहीं जा सका। हालांकि उस दौरान 2007 से 2012 तक विकास दर 6 से 7 प्रतिशत के स्तर पर बनी रही। केवल 2011-12 में विकास दर 5.6 फीसदी तक पहुंच गई थी।
इसके मायने : गरीबी बढ़ेगी, योजनाएं प्रभावित होंगी
राज्य की विकास दर को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों में बांटा गया है। इनमें क्रमश: कृषि, उद्योग एवं सर्विस सेक्टर आते हैं। तीनों ही क्षेत्रों में विकास दर में कमी आई है।
राज्य नियोजन संस्थान के आर्थिक बोध एवं संख्या निदेशक जीएस कटियार के मुताबिक तीनों स्तरों पर वर्ष 2013-14 की विकास दर क्रमश: 1.6, 1.5 और 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं जीएसडीपी पांच फीसदी रहने का अनुमान है। हालांकि 2013-14 में प्रति व्यक्ति आय 33482 रुपये से बढ़कर 36250 रुपये हो गई है।
इंडस्ट्री में 1.2 प्रतिशत वृद्धि दर सकल राज्य घरेलू उत्पाद में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वर्ष 2013-14 में मात्र 1.2 फीसदी की वृद्धि अनुमानित है। वर्ष 2012-13 में यह 1.4 प्रतिशत थी। यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार भी कुछ सुस्त पड़ी है। बिजली, गैस और जलापूर्ति की विकास दर 6.4 फीसदी रही है जबकि उससे पहले साल यह 9.1 प्रतिशत थी।
लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. यशवीर त्यागी के मुताबिक उद्योग सेक्टर में 0.5 फीसदी की गिरावट का मतलब है कि एक साल के दौरान औद्योगिक उत्पादन में कमी आई है।
उद्योगों से राज्य और लोगों की आय अपेक्षाकृत कम हुई है। जाहिर है गरीबी बढ़ेगी और सरकार के राजस्व में भी लक्ष्य के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं होगी। गरीबी व बेरोजगारी दूर करने की योजनाएं और सामाजिक कल्याण के काम प्रभावित होंगे।
ये सेक्टर होंगे बेहतर स्थिति में
प्रदेश में सर्वाधिक विकास दर सर्विस सेक्टर में रही है। हालांकि 2012-13 की तुलना में 2013-14 में यह 0.1 फीसदी कम है। 2013-14 में सर्विस सेक्टर की विकास दर 7.7 प्रतिशत है जबकि उससे पहले साल 7.8 फीसदी थी। सर्विस सेक्टर में फाइनेंस, रीयल एस्टेट, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन, बैंकिंग और इंश्योरेंस में विकास दर बढ़ी है।
इसके मायने : रोजगार के अवसरों में वृद्धि नहीं प्रो. यशवीर त्यागी के मुताबिक सर्विस सेक्टर में लोगों को काफी रोजगार मिलता है। इस सेक्टर में गिरावट का मतलब यह हुआ कि रोजगार के अवसर नहीं बढ़े। अर्थव्यवस्था में कृषि और उद्योग महत्वपूर्ण सेक्टर हैं। इनसे बहुसंख्यक आबादी जुड़ी हुई है।
इनकी विकास दर गिरेगी तो सर्विस सेक्टर भी प्रभावित होगा। जेब में पैसा नहीं होगा तो ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन, ट्रेड, स्टोरेज, बैंकिंग और इंश्योरेंस, होटल, रेस्टोरेट आदि में क्षेत्रों में ज्यादा इन्वेस्टमेंट नहीं होगा।
कृषि क्षेत्र को तगड़ा झटका सबसे बड़ा झटका कृषि क्षेत्र को लगा है। कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र की विकास दर 2012-13 में 4.8 प्रतिशत की तुलना में 2013-14 में मात्र 1.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि खनन के क्षेत्र में विकास दर 7.7 प्रतिशत से बढ़कर 16.6 प्रतिशत पहुंच गई है।
इन क्षेत्रों में होगी सुधार की जरूरत
डॉ. यशवीर त्यागी कहते हैं कि यूपी बहुत बड़ा राज्य है। स्टेट जीडीपी में गिरावट का अर्थ है विकास को गति नहीं मिल पाई। 12वीं पंचवर्षीय योजना में 9 से 10 फीसदी ग्रोथ का लक्ष्य रखा गया है। पंचवर्षीय योजना के दो साल निकल गए। यूपी टारगेट ग्रोथ से लगभग आधा लक्ष्य प्राप्त कर रहा है।
ऐसे में बचे तीन साल में 9-10 फीसदी विकास दर के लक्ष्य को पाना कठिन है। जीएसडीपी में गिरावट से प्रत्यक्ष-परोक्ष तौर पर बेरोजगारी दूर करने में मदद नहीं मिलेगी।
यूं कहें कि गरीबी और बेरोजगारी बढ़ेगी। प्रति व्यक्ति आय में 8.3 फीसदी वृद्धि 204-05 के स्थिर मूल्यों पर आधारित है। यदि चालू कीमतों पर देखें तो यह भी 3.3 फीसदी से ज्यादा नहीं बैठेगी।
क्या करे सरकार अर्थव्यवस्था के स्थायित्व और तीव्र व दीर्घकालीन विकास के लिए सरकार को कृषि एवं उद्योगों में तेजी से आगे बढ़ना होगा। कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना होगा। किसानों को सिंचाई, खाद, बिजली के साथ ही मार्केटिंग और भंडारण पर ध्यान देना होगा।
प्रदेश में औद्योगीकरण का माहौल बनाना चाहिए। यूपी में काफी संभावनाएं हैं, इन्हें कार्यरूप में बदलने पर ध्यान देना होगा। ऐसा नहीं करने पर लक्ष्य और उपलब्धि के बीच गैप बढ़ता रहेगा।
रोकनी होगी कृषि क्षेत्र की बदहाली प्रदेश के वर्तमान हालात पर गिरि इंस्टीट्यूट ऑफ डवलपमेंट स्टडीज के सीनियर फेलो डॉ. सीएस वर्मा का कहना है कि सकल राज्य घरेलू उत्पाद में गिरावट दर्शा रही है कि प्रदेश की आर्थिक सेहत ठीक नहीं है। प्रदेश सरकार को इसे खतरे की घंटी के रूप में लेना चाहिए। कृषि क्षेत्र पर 65 फीसदी लोग निर्भर हैं। बहुत सारे उद्योगों में कच्चा माल कृषि क्षेत्र से आता है।
कृषि उत्पादन व उत्पादकता प्रभावित होने का सीधा असर उद्योगों पर पड़ेगा। यदि गांव की क्रय शक्ति कम होगी तो औद्योगिक उत्पादन की मांग घटेगी। यही हाल सर्विस सेक्टर का भी है। एक बड़ी आबादी की क्रय शक्ति कम रहेगी तो बाजार में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।
आने वाले समय में विकास दर बेहतर हो, इसके लिए सरकार को सबसे पहले कृषि क्षेत्र पर ध्यान देना होगा। किसानों की लागत बढ़ रही है लेकिन उनकी फसलों का मूल्य उस अनुपात में नहीं बढ़ रहा। खेत और बाजार के बीच की खाई बहुत बढ़ गई है। इसे कम करने का रास्ता निकालना होगा।