लखनऊ। रिश्तों की डोर, अब सिर्फ रंगीन धागा नहीं रही... अब वो एक बीज है... जो उगता है यादों में, पलता है परंपरा में और खिलता है उस मुस्कान में…जब बहन अपने भाई की कलाई पर एक प्लांटेबल राखी बांधती है। अब राखी सिर्फ सजावट नहीं, संवेदना है... नारियल के खोल में प्रकृति की पुकार, रुद्राक्ष की लंबाई में भक्ति की गहराई, और डॉल राखियों में मासूम बचपन की मिठास। इस रक्षाबंधन, कलाई पर बांधिए सिर्फ धागा नहीं... एक सोच, एक भाव, एक वादा... जो कहे ‘मैं तुझे सिर्फ राखी नहीं बांध रही, मैं तुझे प्रकृति से, परंपरा से और प्यार से जोड़ रही हूं''।
रक्षाबंधन नजदीक आते ही राजधानी के बाजारों में रौनक लौट आई है। अमीनाबाद से लेकर निशातगंज तक राखी की दुकानों पर महिलाओं और बच्चों की भीड़ देखने को मिल रही है। रंग-बिरंगी, इको-फ्रेंडली और कस्टमाइज्ड राखियों ने ग्राहकों को अपनी ओर खींचा है। इस बार रक्षाबंधन पर सबसे ज्यादा मांग इको-फ्रेंडली और फैशनेबल राखियों की देखी जा रही है। दुकानदारों के अनुसार, रुद्राक्ष की एक मीटर लंबी राखी, खाटू श्याम और राधा-कृष्ण वाली राखियां खास आकर्षण बनी हुई हैं। बच्चों के बीच बार्बी डॉल राखी बेहद लोकप्रिय हो रही है।
इको-फ्रेंडली राखियों की खासियतें:
प्लांटेबल राखियां: इनमें बीज होते हैं जिन्हें राखी के बाद बोया जा सकता है।
बांस या नारियल की राखी: टिकाऊ, प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल।
हैंडमेड क्रॉचेट व पेपर क्विल्ड राखियां: देखने में बेहद अनोखी और कलात्मक।
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फैशनेबल और कस्टमाइज्ड राखियां:
रुद्राक्ष लंबी राखी: एक मीटर लंबी अनूठी डिजाइन वाली।
कस्टमाइज्ड राखियां: भाई के नाम, फोटो या संदेश के साथ खास डिजाइन।
एविल आई राखी: बुरी नजर से बचाव के साथ फैशन स्टेटमेंट।
बार्बी डॉल राखी: बच्चों को ध्यान में रखकर तैयार की गई आकर्षक राखी।
कीमतों की शुरुआत:
इको-फ्रेंडली राखी: 100 रुपये से
फैशनेबल राखी: 60 रुपये से