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बच्चा उठते वक्त लड़खड़ाकर गिर जाता है तो सावधान हो जाएं

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तीन साल तक का बच्चा उठते वक्त गिरे तो डीएमडी की कराएं जांच
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स्टेम सेल थेरैपी के जरिए ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित बच्चों की बचाई जा सकती है जाने
करीब तीन साल का बच्चा अचानक उठने में लड़खड़ाए या बार-बार गिर जाए, एड़ी उठाकर चलेे और यह समस्या बढ़ती जाए तो इसकी वजह ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) हो सकती है। स्टेम सेल थेरैपी के जरिए उसका इलाज किया जा सकता है। यह कहना स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. बीएस राजपूत का। वह मुंबई, दिल्ली केबाद अब लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भी मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
क्या है डीएमडी
शहर आए डॉ. बीएस राजपूत ने बताया कि डीएमडी खतरनाक जन्मजात बीमारी है। यह करीब 3500 बच्चों में किसी एक को होती है।
क्यों खतरनाक
इस बीमारी की चपेट में आने वाले बच्चे 13 से 23 साल केबीच फेफड़ों व हृदय फेल होने की वजह से दम तोड़ देते हैं।
कैसे करते हैं इलाज
पीड़ित के स्किन से कुछ सेल लिए जाते हैं। जिस जीन की वजह से समस्या हो रही है, उसमेें जेनेटिक इंजीनियरिंग केजरिए बदलाव किया जाता है। फिर उसके साथ ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट और स्टेम सेल थेरैपी की जाती है।
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खर्च कितना
इस थेरैपी में एक बार में करीब डेढ़ से दो लाख रुपये खर्च आता है। शुरुआत में चार थेरैपी देनी होती है और फिर हर साल एक थेरैपी की जरूरत पड़ती है। इसके लिए सरकार की ओर से भी मदद की जा रही है। प्रधानमंत्री सहायता योजना और मुख्यमंत्री सहायता योजना के जरिए भी मदद मिल रही है। हालांकि अभी तक इस इलाज को आयुष्मान भारत योजना में शामिल नहीं किया गया है।
स्टेम सेल थेरैपी कितनी कारगर
डॉ. राजपूत बताते हैं कि करीब 10 साल पहले उन्होंने इस पर शोध शुरू किया। शोध में 30 बच्चों को शामिल किया था। इसमें 18 को स्टेम सेल थेरैपी दी गई, जिसमें 14 की सेहत में सुधार हुआ और वे बच गए। चार थेरैपी का पूरा कोर्स नहीं कर पाए। जिन 12 बच्चों को थेरैपी नहीं दी गई, उनमें कुछ की मौत हो गई तो कुछ जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। वह बताते हैं कि उनके शोध को वर्ष 2015 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल एम्ब्रियोलॉजी एंड स्टेम सेल रिसर्च पेपर में जगह मिली।
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कानपुर में विभाग बनाने का प्रयास
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑनरेरी विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. राजपूत ने बताया कि वह मेडिकल कॉलेज में शीघ्र ही रेजेनरेटिव विभाग की स्थापना कराने का प्रयास कर रहे हैं। इससे वहां मस्कुलर डिस्ट्रॉफ्री के अलावा स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, घुटने की आर्थराइटिस और मोटर न्यूरॉन डिजीज आदि का बोन मैरो सेल ट्रांसप्लांट या स्टेम सेल थेरेपी से इलाज किया जा सकेगा।
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