सूरज शुक्ला
लखनऊ। सदर तहसील से 2015 का नकल सवाल रजिस्टर गायब हो गया है। अफसरों को इसकी जानकारी कई महीने पहले हो चुकी है, लेकिन वे मामला दबाए बैठे हैं। न किसी पर कार्रवाई हुई और न ही एफआईआर कराई गई। जिम्मेदार सवालों पर विभागीय जांच चलने की बात कह रहे हैं।
तहसीलों में हर साल का नकल सवाल रजिस्टर तैयार किया जाता है। साल भर में भू अभिलेख संबंधी जो भी नकल निकलवाई जाती हैं, उसका विवरण उस पर दर्ज किया जाता है। ताकि नकल के सत्यापन की जरूरत पड़े तो उसी रजिस्टर से कर लिया जाए। इसी के तहत अधिवक्ता आमिर व मो. तलहा ने सदर तहसील से 2015 से संबंधित भू अभिलेख की नकल के सत्यापन के लिए आवेदन किया। लेकिन नकल का सत्यापन नहीं हो सका। जब उन्होंने आईजीआरएस पर शिकायत की तो तहसील से उसका जवाब आया। इसमें बताया गया कि 2015 के नकल सत्यापन संबंधी रजिस्टर की तलाश की गई, लेकिन नहीं मिला।
लापरवाही या साजिश
रजिस्टर बेहद अहम दस्तावेज होता है। इसके बावजूद उसका डिजिटाइजेशन नहीं किया गया है। अब रजिस्टर के गायब होने से पूरे एक साल में जो भी नकल निकाली गई होंगी, उनका सत्यापन करना संभव नहीं हो सकेगा। ऐसे में फर्जीवाड़े की भी आशंका है। सवाल है कि आखिर रजिस्टर गायब होने के पीछे कोई लापरवाही है या फिर साजिश के तहत ऐसा किया गया।
सवालों के घेरे में नकल नवीस
रजिस्टर तकरीबन 9 साल पुराना है। इन रजिस्टरों की देखरेख नकल नवीस के हवाले रहती है। रजिस्टर गायब होने से नकल नवीस सवालों के घेरे में हैं। सवाल ये भी है कि आखिर किस नकल नवीस के कार्यकाल से रजिस्टर गायब हुआ। ये जांच में ही सामने आ सकता है।
जांच कराई जा रही है
मामले की जानकारी है। जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी आएगा उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- वंदना कुशवाहा, तहसीलदार सदर