साहब मेरी शादी है, छुट्टी नहीं मिली तो कौन चढ़ेगा घोड़ी पर। मेरी बेटी की बारात आनी है, मैं नहीं जाऊंगा तो कन्यादान कौन करेगा।
छुट्टी की अर्जी लेकर अफसरों के चक्कर काटने वाले नौ पुलिसकर्मियों की खुद की और 76 के बेटे-बेटी की शादी है।
चुनाव की तिथि घोषित होने के साथ पुलिस महकमे में छुट्टी पर बंदिश लगा दी गई है। असमंजस में फंसे अफसर इस शर्त पर पांच से सात दिन की छुट्टी मंजूर कर रहे हैं कि हनीमून चुनाव के बाद मनाएंगे।
दरअसल, सहालग के बीच चुनाव की तिथियां हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कांस्टेबल कृष्ण प्रताप, दिलीप कुमार, राकेश यादव, मान सिंह, ललित सिरोही, ज्ञान, रवि कुमार और दो महिला सिपाहियों की इसी महीने तिलक और शादी है।
इसी तरह 76 पुलिसकर्मियों के बेटे-बेटी की शादी चुनाव के दरम्यान होनी है। इन पुलिसकर्मियों की मतदान के विभिन्न चरणों में गैर जिलों में ड्यूटी लगी है।
इन्होंने उच्चाधिकारी को छुट्टी की अर्जी दी। चुनाव के चलते छुट्टी बंद होने की बात पर पुलिसकर्मियों ने अपनी समस्या बताई।
उनकी जगह कोई और दूल्हा या दुल्हन नहीं बन सकता। पिता को ही बेटी का कन्यादान करना है।
संबंधित अधिकारी ने इनकी अर्जी अपने अफसर के सामने प्रस्तुत की। चुनाव की ड्यूटी लेना भी जरूरी और शादी भी जरूरी।
अफसरों ने खुद की शादी वाले पुलिसकर्मियों की अर्जी पर एक हफ्ते, बेटी की शादी के लिए पांच दिन और बेटे की शादी के लिए तीन दिन की छुट्टी मंजूर की लेकिन शर्त है कि समय से रवानगी और समय से आमद दर्ज कराएंगे।
छुट्टी से पहले और बाद में विभिन्न जिलों में चुनाव ड्यूटी करनी होगी। बेटे की शादी में बाराती बनेंगे पिता पुलिसकर्मियों को अपने बेटे की शादी में न्यौता बांटने, मेहमानों की आवभगत या अन्य तैयारियों का मौका नहीं होगा।
वह बारात के एक दिन पहले घर पहुंचेंगे। बेटे की शादी के बाद बहू को घर पहुंचाने के बाद उन्हें ड्यूटी पर लौटना होगा।
चुनाव के बाद हनीमून
जिन पुलिसकर्मियों की खुद की शादी है। उन्होंने विभिन्न रस्मों के चलते तीन-चार दिन पहले से छुट्टी मांगी है।
यानी शादी के तीसरे दिन उन्हें ड्यूटी पर रवाना होना है। चुनाव के बाद उन्हें हनीमून पर जाने का मौका मिलेगा।
सहालग बनाम चुनाव
अफसरों ने उन पुलिसकर्मियों की छुट्टी मंजूर की है जिनकी खुद की शादी है या फिर बेटे-बेटी की। करीबी रिश्तेदार या दोस्तों की शादी में शामिल होने के लिए छुट्टी की अर्जी खारिज कर दी गई हैं।
अफसरों का कहना है कि चुनाव को ध्यान में रखकर शादी तय करनी थी, जबकि मातहतों का तर्क है कि शादी की तिथियां अरसा पहले तय हो जाती हैं।
चुनाव की तिथियां सहालग को ध्यान में रखकर होनी चाहिए। टेंट से लेकर गाड़ी तक के लिए मारामारीलोगों ने शादी-तिलक के लिए टेंट हाउसों में बुकिंग कराई थी।
अब प्रत्याशियों व प्रशासन की तरफ से भी विभिन्न वस्तुओं की बुकिंग कराई जा रही है। इसी तरह अनेक वाहन अधिग्रहीत होने से बारात जाने वाली गाड़ियों की भी मारामारी शुरू हो गई है।
डेढ़ महीने में 24 सहालगें
लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने से मतगणना के बीच सहालगों का भी दौर है। महानगर निवासी आचार्य प्रदीप तिवारी के मुताबिक नए संवत्सर की पहली लग्न 15 अप्रैल से मिलेगी।
अप्रैल माह में 11 और मई माह में 21 लग्नें हैं। 16 मई को मतगणना की गिनती तक देखा जाये तो इस दौरान 24 उत्तम लग्न हैं।