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केंद्र की चुप्पी से मंडराया लखनऊ मेट्रो पर खतरा!

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मेट्रो रेल परियोजना के लिए 1009 करोड़ रुपए वित्तीय वर्ष-2015-16 में देने पर राज्य सरकार ने अपनी सहमति दे दी है। जिसको राज्य सरकार के बजट में घोषित कर दिया जाएगा। ये बजट 2015-16 के लिए तो पर्याप्त होगा, मगर अगले वित्तीय वर्ष में बजट के संकट का सामना एलएमआरसी को करना पड़ेगा।
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राज्य सरकार अब अगले साल अपने पास इस प्रोजेक्ट कोई धन नहीं लगा सकेगी। ऐसे में पीआईबी स्वीकृति न मिलने की दशा में प्रोजेक्ट फंस जाएगा। जबकि, विदेशी ऋण को फाइनल करने के लिए 31 मार्च तक पीआईबी स्वीकृति को हासिल करना होगा।

एलएमआरसी अधिकारियों के मन में अब चिंता स्पष्ट होने लगी है। सरकार के स्तर पर भी केंद्र सरकार से बातचीत जारी है। मगर केंद्र सरकार की चुप्पी अब इस परियोजना के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है।
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एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव कहते हैं कि, हमको पीआईबी की स्वीकृति मिल जाएगी। मगर कब, इस बात का जवाब उनके पास नहीं है। केशव साफ करते हैं कि, हमको पीआईबी स्वीकृति कब मिल सकेगी, इसका जवाब तो केंद्र सरकार ही दे पाएगी। हम इसमें कुछ भी नहीं कह सकते हैं। हमारी कोशिशें जारी हैं। एलएमआरसी और राज्य सरकार के दोनों के स्तर पर सारे प्रयास हो रहे हैं।

राज्य का 20 फीसदी कोटा हुआ खत्म

प्रदेश सरकार ने एलएमआरसी के 1009 करोड़ रुपये के बजट के लिए हामी भर दी है। जिसका अनुमोदन राज्य सरकार के बजट में किया जाएगा। मगर इस 1009 करोड़ रुपये और विगत वित्तीय वर्ष के लगभग 300 करोड़ रुपये मिला कर राज्य इस परियोजना के बजट में खर्च के अपने 20 फीसदी कोटे को पूरा कर लेगी। जिसके बाद में साल-2016 और 17 के लिए राज्य को केंद्र सरकार से 1400 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी।

केंद्र ने वित्तीय वर्ष-2014-15 में 100 करोड़ रुपये की घोषणा की थी, मगर वह 100 करोड़ रुपये अब तक नहीं दिया गया है। कुमार केशव कहते हैं कि, 31 मार्च तक पीआईबी की एक मीटिंग संभव है। उसमें लखनऊ मेट्रो का अनुमोदन अगर हो गया तो हम निश्चित तौर पर बहुत तेजी से आगे बढ़ सकेंगे। वरना सबसे पहले तो हमे विदेशी ऋण में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। विदेशी एजेंसियों के साथ तमाम दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं, मगर बिना पीआईबी के ऋण नहीं मिल सकेगा।

145 करोड़ रुपये 32 वीं वाहिनी पीएसी में 145 करोड़ रुपये का टेंडर अनुमोदित कर दिया गया है। एलएमआरसी बोर्ड की मीटिंग में इस टेंडर को पास किया गया। टेंडर की बिक्री 16 फरवरी से एलएमआरसी कार्यालय में ही शुरू हो जाएगी। इसके अलावा सिग्नल और रेलवे पॉवर सप्लाई से जुड़े दो अधिकारियों की रेलवे से प्रतिनियुक्ति भी एलएमआरसी में बहुत जल्द ही की जाएगी।
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नए ऑफिस का काम शुरु

इसके अलावा एलएमआरसी के निदेशक महेंद्र कुमार ने बताया कि, अब आलमबाग तक हुए काम में 380 के पाइल और 30 पियर्स लगाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि अगले कुछ दिनों में एलएमआरसी 11 रिग मशीनें लगा कर काम शुरू कर देगा। जिससे काम तेजी पकड़ेगा। उन्होंने बताया कि, आलमबाग में कारोबारियों ने काफी सहयोग किया है। जिससे काम ने और अधिक तेजी पकड़ी है।

निदेशक महेंद्र कुमार ने बताया कि, एलएमआरसी के नये आफिस में सिविल वर्क नये सिरे से शुरू करा दिये गये हैं। सामाजिक परिवर्तन स्थल गोमती नगर के सामने प्रशासनिक भवन में एलएमआरसी का आफिस बनवाया जाएगा। यहां अब तक ग्रामीण आजीविका मिशन का आफिस है। इस आफिस के पूरी तरह से खाली होने के बाद और यहां बचे हुए निर्माण कार्य पूरे होने पर 28 मार्च को एलएमआरसी के अधिकारी वहां शिफ्ट हो जाएंगे।
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