राज्य महिला आयोग सभागार में सदस्यों के साथ समीक्षा बैठक करतीं अध्यक्ष डॉ. बबीता चौहान, उपाध्यक्
लखनऊ। राज्य महिला आयोग की मंगलवार को गोमतीनगर स्थित कार्यालय में हुई कार्यशाला और मासिक बैठक में महिला सशक्तीकरण को लेकर नई दिशा में सोचने की जरूरत पर जोर दिया गया। बैठक में आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने कहा कि आज के ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के युग में महिलाओं को केवल पार्लर, सिलाई और कढ़ाई तक सीमित नहीं किया जा सकता। अब उन्हें ड्रोन चलाने व बनाने, एआई के उपयोग और नई तरह की खेती जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
बैठक में कौशल विकास विभाग की एडिशनल मैनेजिंग डायरेक्टर (पीसीएस) प्रिया सिंह ने विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत इस वर्ष 19,093 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनमें 13,903 महिलाएं शामिल हैं। वहीं, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के तहत वर्ष 2014 से अब तक 1,69,094 महिलाओं को रोजगार मिला है।
हालांकि, आयोग की सदस्यों ने चिंता जताई कि राज्य के करीब 90 प्रतिशत प्रशिक्षण केंद्रों पर मुश्किल से एक-दो प्रशिक्षु ही मिलते हैं, अधिकांश केंद्र खाली रहते हैं। अध्यक्ष ने कहा कि योजनाओं के कागजी आंकड़े और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। जरूरतमंद महिलाओं तक इन योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा। बैठक में उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, सचिव चारू चौधरी, डॉ. एमके सिंह (असिस्टेंट डायरेक्टर, लखनऊ) समेत सभी सदस्य मौजूद रहे।
निरीक्षण व्यवस्था की सिफारिश
अध्यक्ष बबीता चौहान ने प्रस्ताव रखा कि हर जिले के कम से कम एक प्रशिक्षण केंद्र की जिम्मेदारी महिला आयोग की सदस्य को सौंपी जाए। वे नियमित रूप से निरीक्षण करें, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ महिलाओं तक पहुंच सके।