लंबे रूट की रोजवेज बसों में टोल प्लाजा व पेट्रोल पंपों पर ड्राइवरों का ब्रेथ एनेलाइजर टेस्ट कराया जाएगा। इससे पता लगेगा कि उन्होंने शराब तो नहीं पी रखी है। यमुना एक्सप्रेस-वे पर भीषण बस हादसे के बाद परिवहन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिश को राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है। यह जानकारी संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने शुक्रवार को विधानसभा में दी। वह बसपा के सुखदेव राजभर के सवाल का जवाब दे रहे थे।
खन्ना ने कहा कि मोटर ट्रासपोर्ट वर्कर्स एक्ट 1961 के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित मानक के अनुसार ही परिहवन निगम की बसों के संचालन के लिए चालकों की ड्यूटी लगाई जाती है। मानक है कि चालक सप्ताह में 48 घंटे से से ज्यादा ड्यूटी नहीं करेगा। विशेष परिस्थितियों में 54 घंटे तक ड्यूटी ली जा सकती है। पांच घंटे की यात्रा के बाद आधा घंटा आराम लेना होगा। उन्होंने यमुना एक्सप्रेस-वे पर बस हादसे में चालक की मृत्यु की वजह पानी में डूबने से बताई गई है। इसके और भी कारण हो सकते हैं। संभव है कि चालक स्वस्थ न हो। हादसे से पहले बस 50 मीटर तक घसीटती रही। उसका स्टीयरिग घूमना चाहिए था।
संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि हादसे के दिन रात 11 बजे ड्यूटी पर जाने से पहले चालक तीन दिन की छुट्टी पर था। 6-7 बार वह उस रूट पर जा चुका था। हादसा टोल प्लाजा पार करने के सात मिनट बाद सवेरे लगभग चार बजे हुआ। बसपा की सुषमा पटेल ने पूछा कि क्या लंबी दूरी की बसों के चालकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था है, क्या जांच की जाती है कि वे नशे में तो नहीं हैं। सुरेश खन्ना ने कहा कि अभी तक प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं है। लेकिन, नशे की जांच की जाएगी।